5 लाख के कर्ज के लिए रची खुद की मौत की साजिश, दोस्त का कत्ल कर 8 महीने तक पुलिस को छकाया

Fake Death Conspiracy: गोंदिया में 5 लाख के बैंक कर्ज से बचने के लिए युवक ने रची अपनी मौत की साजिश। दोस्त की हत्या कर पहचान बदली और 8 महीने तक फरार रहा। आमगाव पुलिस ने किया सनसनीखेज खुलासा।
Staged His Own Death to Escape a ₹5 Lakh Debt; Murdered a Friend and Eluded the Police for Eight Months
सांकेतिक फोटो (सोर्स: डिजाइन)
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Gondia Man Faked Death: महाराष्ट्र के गोंदिया जिले से मानवीय क्रूरता की सारी हदें पार कर देने वाली एक सनसनीखेज घटना सामने आई है। यहाँ एक युवक ने बैंक के कर्ज से बचने के लिए न केवल अपनी मौत का नाटक रचा, बल्कि इस साजिश को अंजाम देने के लिए अपने ही जिगरी दोस्त की बेरहमी से हत्या कर दी। दृश्यम फिल्म की तरह बुने गए इस ठंडे दिमाग वाले कत्ल का खुलासा करीब 8 महीने बाद हुआ है, जिसने पूरे जिले में हड़कंप मचा दिया है।

कर्ज का बोझ और खूनी साजिश

देवरी तहसील के डोंगरगांव का रहने वाला 28 वर्षीय आरोपी अंतिम ओमप्रकाश खोटेले पोल्ट्री फार्म का व्यवसाय करता था। इस व्यवसाय के लिए उसने देवरी अर्बन बैंक से 5 लाख रुपये का कर्ज लिया था। धंधा मंदा होने के कारण वह कर्ज नहीं चुका पा रहा था और कानूनी कार्रवाई के डर से भारी तनाव में था। इस कर्ज से हमेशा के लिए पीछा छुड़ाने के लिए उसने खुद को दुनिया की नजरों में मृत घोषित करने का खौफनाक प्लान बनाया।

दोस्त का भरोसा और बेरहम कत्ल

अंतिम को अपनी मौत का नाटक रचने के लिए एक ऐसे शरीर की जरूरत थी, जिसे वह अपनी पहचान दे सके। इसके लिए उसने अपने ही गांव के 46 वर्षीय दोस्त चंद्रकुमार सराटे को शिकार बनाया। 28 अगस्त 2025 की आधी रात को अंतिम, चंद्रकुमार के घर गया और 'काम है' कहकर उन्हें अपनी बाइक पर बैठा लिया। वह उन्हें बाह्मणी रेलवे पटरी के पास ले गया, जहाँ उसने उन्हें जबरदस्ती शराब पिलाई।

जब चंद्रकुमार नशे में पूरी तरह असहाय हो गए, तब 29 अगस्त की सुबह अंतिम ने अपने दुपट्टे से उनका गला घोंट दिया। हत्या के बाद उसने शातिर तरीके से सबूतों के साथ छेड़छाड़ की। उसने चंद्रकुमार के कपड़े उतारकर उन्हें अपने कपड़े पहना दिए और उनकी जेब में अपना आधार कार्ड और एटीएम कार्ड रख दिया, ताकि पुलिस और बैंक को लगे कि मरने वाला व्यक्ति अंतिम खोटेले ही है।

8 महीने का आभासी खेल

हत्या के बाद अंतिम ने अपनी बाइक भी घटनास्थल के पास छोड़ दी और खुद फरार हो गया। 8 महीनों तक दुनिया और बैंक की नजर में अंतिम मर चुका था और उसका कर्ज भी कागजों में खत्म होने की कगार पर था। लेकिन चंद्रकुमार के भाई रमेश सराटे को अपने भाई के अचानक गायब होने पर शक हुआ।

रमेश की शिकायत पर आमगाव पुलिस ने जब तकनीकी जांच शुरू की, तो परतें खुलने लगीं। पुलिस ने पाया कि जिस अंतिम खोटेले को मृत मान लिया गया था, वह असल में कहीं जीवित है। पुलिस का घेरा बढ़ता देख आरोपी के पिता ने ही उसे पुलिस स्टेशन लाकर कानून के हवाले किया। पुलिस ने अब अंतिम को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है।

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