कुपोषण रिपोर्ट (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Malnutrition Free Campaign: राज्य सरकार महाराष्ट्र को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए कई कदम उठा रही है। लेकिन, गोंदिया जिले में कुपोषण अभी भी कम नहीं हो रहा है। आज की स्थिति में, जिले में 0.89 प्रतिशत बच्चे कुपोषित हैं। सरकार द्वारा कुपोषण निर्मूलन के लिए शुरू किया गया राजमाता जिजाऊ कुपोषण मुक्त अभियान जिले में फेल हो गया है।
अगर फरवरी के आखिर तक गोंदिया जिले में कुपोषित बच्चों के आंकड़ों को देखें, तो कुपोषण (Malnutrition) की दर उम्मीद के मुताबिक कम नहीं हुई है। जिले में 578 बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित हैं, और कुपोषण की सबसे ज्यादा दर गोंदिया तहसील में है, जिसका प्रश 61 है। फिर भी, जिला प्रशासन आंगनवाड़ियों के जरिए कुपोषण को खत्म करने का प्रयास कर रहा है।
फरवरी 2026 तक, जिले में 3,771 बच्चे कम वजन के और 578 बच्चे बहुत ज्यादा कम वजन के पाए गए। अगर पिछले तेरह सालों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो पता चलता है कि जिले में कुपोषण की दर कुछ हद तक कम हुई है। मार्च 2013 में कुपोषण की दर में काफी कमी आई थी।
उस साल, 6014 बच्चे कम वजन के और 1175 बच्चे बहुत ज्यादा कम वजन के थे। मार्च 2014 में, कुपोषण की दर फिर से बढ़ गई और 8,332 बच्चे कम वजन के और 1,732 बच्चे बहुत ज्यादा कम वजन के पाए गए। जबकि फरवरी 2015 में, 5951 बच्चे कम वजन के और 1179 बच्चे बहुत ज्यादा कम वजन के पाए गए।
इन आंकड़ों के अनुसार, ग्राफिक आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि जिले में कुपोषण की दर 2026 में कम हुई है। फरवरी 2026 तक, कम वजन वाले 3,771 बच्चे और गंभीर रूप से कम वजन वाले 578 बच्चे पाए गए। जिले में कुपोषण का सबसे ज्यादा फैलाव अभी दो तहसील, गोंदिया और अर्जुनी-मोरगांव में देखा जा रहा है। गोंदिया तहसील में 134 बच्चे और अर्जुनी-मोरगांव तहसील में 121 बच्चे कुपोषित पाए गए हैं। इन दो तहसीलों में कुपोषित बच्चों की संख्या सबसे ज्यादा देखी गई है।
जिला महिला व बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले को कुपोषण-मुक्त बनाने के लिए प्रभावी उपाय लागू करने की जरूरत है। स्वास्थ्य विभाग के दिए गए आंकड़ों से यह साफ है कि आदिवासी बहुल गांवों और बस्तियों में कुपोषण सबसे ज्यादा है। इसलिए, इन गांवों में प्रभावी उपाय लागू करने की जरूरत है।
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गोंदिया जिला परिषद से जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अभिजीत गोल्हार ने कहा जिले के आदिवासी बहुल और नक्सल प्रभावित इलाकों पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया गया है। इसलिए जिले में कुपोषित लोगों की संख्या में कमी आई है। स्वास्थ्य विभाग जिले को कुपोषण (Malnutrition) से मुक्त करने के लिए प्रतिबद्ध है और पूरी कोशिश की जा रही है। गर्भवती माताओं और बच्चों को पौष्टिक खाना देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन इलाकों में माताओं और बच्चों की नियमित जांच की जा रही है। आने वाले समय में जिले में कुपोषित लोगों की संख्या में काफी कमी आएगी।