आदिवासी विकास महामंडल का मक्का खरीदी से इनकार; अब जिला मार्केटिंग फेडरेशन के 8 केंद्रों पर होगी खरीदी
गोंदिया में गोदामों की कमी के चलते आदिवासी विकास महामंडल ने मक्का खरीदी केंद्र शुरू करने से मना कर दिया है। अब जिलाधीश के निर्देश पर मार्केटिंग फेडरेशन 8 केंद्रों पर 2400 रुपये के समर्थन मूल्य
Gondia Maize Procurement: गोंदिया जिले में इस वर्ष मक्का उत्पादक किसानों को राहत देने के लिए जिला मार्केटिंग फेडरेशन आगे आया है। आदिवासी विकास महामंडल द्वारा गोदाम की अनुपलब्धता के कारण मक्का खरीदी केंद्र शुरू करने से इनकार करने के बाद अब जिलाधिकारी के निर्देश पर मार्केटिंग फेडरेशन को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके तहत आदिवासी और गैर-आदिवासी दोनों क्षेत्रों में समर्थन मूल्य पर मक्का खरीदी की जाएगी।
जिले के किसान पिछले दो-तीन वर्षों से धान के विकल्प के रूप में मक्का की खेती की ओर रुख कर रहे हैं। इस वर्ष करीब 1200 हेक्टेयर क्षेत्र में मक्का की बुवाई की गई है, जिसमें सड़क अर्जुनी और अर्जुनी मोरगांव क्षेत्र प्रमुख हैं। किसानों को उचित मूल्य दिलाने के लिए शासन द्वारा समर्थन मूल्य पर खरीदी की व्यवस्था की जाती है, लेकिन गोदाम नहीं होने से आदिवासी विकास महामंडल इस बार पीछे हट गया।
किसानों को नुकसान से बचाने के लिए जिला प्रशासन ने तुरंत निर्णय लेते हुए मार्केटिंग फेडरेशन को आठ खरीदी केंद्र संचालित करने के निर्देश दिए हैं। इन केंद्रों पर मक्का बेचने के लिए किसानों का ऑनलाइन पंजीयन 1 अप्रैल से शुरू हो चुका है। अब तक 424 किसान पंजीकरण करा चुके हैं। सरकार ने मक्का का समर्थन मूल्य 2400 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जिससे किसान निर्धारित दर पर अपनी उपज बेच सकेंगे।
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1 मई से खरीदी शुरू
फेडरेशन द्वारा स्वीकृत आठ केंद्रों पर पंजीकृत किसानों से 1 मई से मक्का खरीदी शुरू होगी। जिला मार्केटिंग फेडरेशन के अधिकारी विवेक इंगले के अनुसार, आदिवासी क्षेत्रों के किसानों को भी इन केंद्रों पर पंजीयन कराना अनिवार्य होगा ताकि वे समर्थन मूल्य का लाभ ले सकें।
निजी बाजार में कम दाम से नुकसान
इस समय मक्का की कटाई और दाने निकालने का कार्य तेजी से चल रहा है, लेकिन सरकारी खरीदी शुरू नहीं होने के कारण कई किसान मजबूरी में निजी व्यापारियों को मात्र 1700 रुपये प्रति क्विंटल की दर से मक्का बेच रहे हैं। जबकि समर्थन मूल्य 2400 रुपये है, जिससे किसानों को करीब 700 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
