Gondia Summer News: गोंदिया जिले में भीषण गर्मी के बीच मवेशियों के लिए चारे और पानी की कमी गंभीर समस्या बनती जा रही है। एक ओर प्रशासन चारे की पर्याप्त उपलब्धता का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर पशुपालक वास्तविकता में भारी कमी से जूझ रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि मजबूरी में पशुपालक अपने मवेशियों को बाजार में बेचने के लिए ले जा रहे हैं, जिससे पशु बाजारों में भीड़ बढ़ती जा रही है।
जिले में अधिकांश किसान खेती के साथ पशुपालन भी करते हैं, जिसमें डेयरी, बकरी पालन और कुक्कुट पालन प्रमुख हैं। लेकिन वर्तमान परिस्थिति में यही पूरक व्यवसाय अब बोझ बनता जा रहा है। गर्मी के मौसम में सूखा चारा भी सीमित मात्रा में उपलब्ध है, जबकि पानी की कमी के कारण हरा चारा उगाना लगभग असंभव हो गया है।
आंकड़ों के अनुसार, जिले में पशुधन की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। पहले जहां कुल पशुधन 5.83 लाख के आसपास था, वहीं अब यह घटकर करीब 2.80 लाख रह गया है। एक साल से कम उम्र के बछड़े-बछियों की संख्या 62,117 है, जबकि मवेशियों के लिए प्रतिदिन लगभग 2,452 मीट्रिक टन चारे की आवश्यकता बताई जा रही है।
पानी की किल्लत ने संकट को और गहरा कर दिया है। गांवों के तालाब, नदी-नाले और बांध सूख चुके हैं, जिससे पशुओं के लिए पानी की उपलब्धता भी चुनौती बन गई है। पशुपालक प्रशासन से तत्काल पानी और चारे की व्यवस्था करने की मांग कर रहे हैं।
इस स्थिति का असर डेयरी व्यवसाय पर भी पड़ने की आशंका है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो जिले में पशुपालन गतिविधियां और घट सकती हैं, जिससे किसानों की आय पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।