

Mrig Nakshatra Dry Vidarbha Rain: इस वर्ष बारिश को लेकर जिले में चिंता का माहौल पैदा हो गया है। मानसून आने के बाद भी मानसून का कोई संकेत नहीं दिख रहा है। बरसात की शुरुआत में ही बारिश पता नहीं होने से मुख्य फसलों की बुआई पूरी तरह से बाधित हो गई है और किसानों की निगाहें आसमान पर टिक गई हैं।
25 मई को शुरू हुए रोहिणी नक्षत्र के पूरी तरह समाप्त हो जाने के बाद 8 जून को शुरू हुए मृग नक्षत्र से किसानों को काफी उम्मीदें थीं। क्योंकि मृग नक्षत्र का वाहन 'मेंढ़क' है, इसलिए शुरुआत में अच्छी बारिश के संकेत थे, लेकिन मृग की पूरी अवधि समाप्त होने के बावजूद बारिश नहीं हुई।
यह नक्षत्र 21 जून को समाप्त हो गया और अब जिले के किसानों की पूरी उम्मीद 22 जून से शुरू होने वाले 'आर्द्रा' नक्षत्र के गधे वाहन पर निर्भर है। कई किसानों ने इस विश्वास के साथ खरीफ सीजन की तैयारी की थी कि मृग नक्षत्र की शुरुआत में बारिश होगी। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के बावजूद जिले में मानसून की तीव्रता काफी कम है। जिले में अब तक 9।3 मिनी बारिश के औसत स्तर की तुलना में चिंता के बादल छाए हैं।
| तहसील | बारिश (मिमी में) |
| सालेकसा | 2.0 |
| गोंदिया | 12.8 |
| अर्जुनी मोरगांव | 10.3 |
| देवरी | 8.9 |
| गोरेगांव | 7.6 |
| तिरोड़ा | 6.2 |
| आमगांव | 4.9 |
मृग नक्षत्र सूखे जाने के कारण गोंदिया जिले के हजारों किसान चिंतित हैं। बीज, खाद और खेती महंगी होने के बावजूद बुआई नहीं हो पाने से आर्थिक गणित गड़बड़ा गया है। यदि जून के अंत तक मानसून सक्रिय हो जाता है, तो खरीफ सीजन ठीक हो सकता है। अन्यथा कृषि विशेषज्ञों को डर है कि बुआई का रकबा घट जाएगा।
सानेगांव किसान रामेश्वर वारई ने कहा है कि "खेती की साफ-सफाई व जुताई का काम पूरा हो गया है। बीज भी लेकर हो गए है। लेकिन अब तक भारी बारिश नहीं होने के कारण बुआई बाधित हो गई। मृग नक्षत्र सूखा जाने से चिंता बढ़ गई है। अब आर्दा के गधे पर आस लगाए बैठे हैं।"
मृग नक्षत्र में बारिश की उम्मीद लगाए बैठे किसानों को भारी निराशा हुई है और खेत अभी भी सूखे पड़े हैं। बारिश की कमी से कई शुष्क भूमि वाले किसानों ने मिट्टी में नहीं होने के बावजूद 'मेद की बुआई' शुरू कर दी है। यदि आने वाले सप्ताह में संतोषजनक वर्षा नहीं हुई, तो धान की खेती असंभव हो जाएगी।
मृग नक्षत्र के सूखे जाने के बाद अब आर्द्रा नक्षत्र से बड़ी उम्मीद है। जिले के आम आदमी व किसान इस नक्षत्र में होने वाली बारिश पर ही निर्भर रहेंगे।