

Gondia Shiva Temple Lahari Baba News: गोंदिया संत लहरी आश्रम मध्यकाशी कामठा में श्रद्धालु शिवजी की पूजाअर्चना करते हैं। क्षेत्र के साथ ही मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ व महाराष्ट्र के श्रद्धालु यहां प्रतिदिन संत लहरीबाबा आश्रम के मंदिर में पहूंचकर पूजाअर्चना कर अपनी मनोकामना पूरी करते हैं।
संत लहरी बाबा आश्रम में सावन मास, लहरी जन्मोत्सव, महाशिवरात्रि, गुरूपुर्णिमा व अन्य त्योहार बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। महीने के पहले गुरुवार को सत्संग पूजाअर्चना होती है।
सावन माह, गुरु पुर्णिमा महोत्सव, मासिक सत्संग, रक्षाबंधन, आध्यात्मिक सत्संग, शिविर, कोजागिरी, कर्मयोगिनी माता भागीरथी पुण्यतिथि, संत लहरीबाबा जन्मोत्सव, मकर संक्रांति, सर्व पर्व, महाशिवरात्रि उत्सव, राष्ट्रीय त्योहार, महापुरुषों की जयंतियां व अन्य त्योहार मनाए जाते हैं।
उल्लेखनीय है कि तहसील के अंतर्गत संत लहरी आश्रम मध्यकाशी कामठा में किसी भी महिमा के पीछे वहां के पावन भूमि की शक्ति व संत महात्माओं के अनेकों अवतारों में किए गए पुण्य कार्य व ग्राम कामठा संत श्री लहरीबाबा आश्रम यह तीर्थक्षेत्र महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है।
संत श्री लहरी आश्रम कामठा गोंदिया से ईशान्य दिशा की ओर 20 किमी. की दूरी पर ग्राम कामठा में बसा हुआ है। इस पावन भूमि में भ्रमण में संत लहरीबाबा आश्रम व उनके द्वारा बनाया गया भव्य अनोखा शिवमंदिर भारत देश में अपने आप में अति अद्वितीय अप्रतीम शिवमंदिर है।
संगमरमर की मूर्तिमा स्थापित संत लहरीबाबा का मन बचपन से ही भक्ति कामों में अधिक रहता था। श्रद्धालुओं की सेवा के लिए सन 1956 में कामठा आश्रम का निर्माण किया। श्रद्धालु भक्त सत्संग करने के लिए गुरुवार को आश्रम में आने लगे।
संत लहरीबाबा आश्रम कामठा में भव्य शिवलिंग है जिसकी ऊंचाई 78 फुट, लंबाई 90 फुट चौड़ाई 40 फुट है। शिव मंदिर संगमरमर के पत्थर से निर्मित मंदिर हैं, शंकरमाता पार्वती की संगमरमर की मूर्तिमा स्थापित है।
मंदिर में लगाई 216 घंटिया शिवमंदिर के द्वितीय खंड के प्रथम तल में 6 फुट ऊंचा 5 टन वजनी शिवलिंग की मूर्ति है। मंदिर में 216 घंटिया लगाई गई हो जो कि हवा से स्वयं गुंजन करती है। संत लहरीबाबा पिरामिड कुटी वैज्ञानिक तरीके से निर्मित है। यहां वानप्रस्थ साधकों की 30 कुटियां निर्मित है।
गौशाला, श्री लहरी धर्मार्थ दवाखाना व शिवमंदिर के ईशान्य में जलकूप है जिसे पातालगंगा के नाम से जाना जाता है। लहरी साहित्य केंद्र, अन्नपूर्णा भंडार, लहरी ज्ञान कुटी, संजीवन धाम, समाधीस्थल, कार्यालय व अन्य उस परिसर में है।