

Zilla Parishad Gondia: राज्य के जलापूर्ति व स्वच्छता विभाग के अंतर्गत संचालित जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत मिशन में जिला व तहसील स्तर पर कार्यरत संविदा कर्मचारियों का पिछले आठ महीने से मानदेय लंबित है। इससे कर्मचारियों पर गंभीर आर्थिक संकट आ गया है। कर्मचारियों का आरोप है कि राज्य स्तर पर निधि उपलब्ध होने के बावजूद संबंधित अधिकारियों की लापरवाही के कारण मानदेय का भुगतान नहीं किया जा रहा है। इसी के विरोध में गुरुवार से जिला परिषद स्तर पर कामबंद आंदोलन शुरू कर दिया गया है।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि 3 अगस्त तक बकाया मानदेय का भुगतान नहीं किया गया तो मुंबई के आजाद मैदान में उग्र आंदोलन किया जाएगा। कर्मचारियों का कहना है कि पिछले दो दशकों से वे जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत मिशन की विभिन्न योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, जनजागरूकता, सर्वेक्षण तथा ग्रामीण स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण कार्य विपरीत परिस्थितियों में भी लगातार करते आ रहे हैं।
सीमित मानदेय, संसाधनों की कमी और बढ़ते कार्यभार के बावजूद उन्होंने राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर कई उपलब्धियां दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हाल ही में स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण अभियान में उत्कृष्ट कार्य के लिए राज्य जल व स्वच्छता मिशन प्रकोष्ठ के अतिरिक्त अभियान संचालक को पंढरपुर में मुख्यमंत्री के हाथों सम्मानित किया गया। कर्मचारियों का कहना है कि इस उपलब्धि के पीछे दिन-रात मेहनत करने वाले संविदा कर्मियों को ही आठ महीने से मानदेय नहीं मिला है, जिससे उनमें नाराजगी है।
राज्य संगठन समन्वयक अतुल गजभिये ने कहा कि कर्मचारियों के ईमानदार काम का श्रेय अधिकारियों को पिछले आठ महीनों से वेतन नहीं मिलने के बावजूद कर्मचारी पूरी ईमानदारी से अपने दायित्व निभा रहे हैं। उनके कार्य का श्रेय अधिकारियों को पुरस्कार के रूप में मिल रहा है, जबकि वास्तविक मेहनत करने वाले कर्मचारी आर्थिक तंगी से जूझ रहे है। सरकार को संविदा कर्मियों के साथ न्याय करना चाहिए।