

Gondia NH53 Traffic Chaos: नागपुर-रायपुर राष्ट्रीय राजमार्ग क्र। 53 पर स्थित सड़क अर्जुनी तहसील के सौंदड़ परिसर में ओवरब्रिज के निर्माण कार्य ने आम जनता की जिंदगी बेहाल कर दी है। 30 अप्रैल की रात 11 बजे से भीषण जाम लगा, जो 1 मई की दोपहर करीब 12 बजे जाकर खुला। करीब 12 घंटे तक हजारों वाहन सड़क पर फंसे रहे, जबकि प्रशासन पूरी तरह बेखबर नजर आया। बताया जा रहा है कि पुलिस सुबह 7 बजे ट्रैफिक सुचारु करने में जुट गई। जिसके बाद यातायात सुचारू किया गया।
जानकारी के अनुसार, सौंदड़ में चंद्रपुरगोंदिया रेलवे लाइन और राष्ट्रीय राजमार्ग पर ओवरब्रिज का निर्माण कार्य पिछले 7 से 8 वर्षों से धीमी गति से चल रहा है। इसी अधूरे काम ने एक बार फिर विकराल रूप ले लिया। रात के समय अचानक पुल पर दो सीमेंट राफ्टर रखने के लिए पूरी यातायात बंद कर दी गई, लेकिन इसकी कोई पूर्व सूचना स्थानीय प्रशासन को नहीं दी गई।
इस लापरवाही का खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ा। जाम में छोटे बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग और एम्बुलेंस में मरीज तक फंसे रहे। पूरी रात लोग बिना किसी सुविधा के सड़क पर परेशान होते रहे। समन्वय की कमी उजागरस्थिति इतनी गंभीर थी कि स्थानीय पुलिस को भी इस काम की कोई जानकारी नहीं थी। पुल निर्माण कर रही पिलकॉन कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर प्रकाश नायर ने बताया कि उन्होंने एनएचएआई से अनुमति ली है, हालांकि आधी बात करके दो बार फोन काट दिया। पुलिस का कहना है कि ऐसे काम के लिए जिलाधीश की अनुमति जरूरी होती है, ताकि यातायात प्रभावित न हो।
इस विरोधाभास ने पूरे मामले में गंभीर लापरवाही और समन्वय की कमी को उजागर कर दिया है। कोई वैकल्पिक मार्ग नहीं ,कंपनी ने बिना किसी वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था किए ही काम शुरू कर दिया। हाईवे जाम होने के बाद कुछ वाहन गांव के अंदरूनी रास्तों से निकलने लगे, जिससे वहां भी भारी जाम की स्थिति बन गई।
करीब 15 से 20 किलोमीटर लंबा जाम लगा था। एक ओर सौंदड़ से ग्राम कोहमारा के आगे तक वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं, तो दूसरी ओर सौंदड़ से उकारा फाटा के आगे तक ट्रैफिक पूरी तरह ठप हो गया था। 12 घंटे तक जनता को सड़क पर फंसा कर रखने की इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
बच्चों सहित मरीजों को परेशानी सड़क अर्जुनी तहसील के सौंदड़ क्षेत्र में स्थित ओवरब्रीज पर 2 सीमेंट राफ्टर रखने के लिए पूरी यातायात बंद कर दी गई। जिसकी कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई थी। जिसके चलते करीब 12 घंटों तक यातायात जाम था। इस बीच वाहनों फंसे छोटे बच्चें, बुजुर्ग व मरीजों को काफी परेशानियों को सामना करना पड़ा। अगर पहले से सूचना या डायवर्जन होता तो यह हालात नहीं बनते।