निजी व्यापारियों को धान बेचने को मजबूर किसान, 600 रुपए प्रति क्विंटल का हो रहा नुकसान
Gondia News: गोंदिया में सरकारी धान खरीदी अब तक शुरू न होने से किसान निजी व्यापारियों को कम दाम पर धान बेचने को मजबूर हैं, जिससे उन्हें 500-600 रुपए प्रति क्विंटल का नुकसान हो रहा है।
- Written By: आकाश मसने
धान खरीदी केंद्र (सोर्स: सोशल मीडिया)
Paddy Procurement Delay In Gondia: इस साल का नवंबर खत्म होने वाला है, लेकिन जिला मार्केटिंग फेडरेशन और आदिवासी विकास महामंडल के सरकारी धान खरीदी केंद्र पर धान की खरीदी शुरू नहीं हुई है। हालांकि सरकारी धान खरीदी केंद्र पर धान बेचने के लिए पंजीयन प्रक्रिया चल रही है, लेकिन धान की खरीदी शुरू नहीं होने से किसानों को जरूरत के चलते निजी व्यापारियों को धान बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इससे उन्हें 500 से 600 रुपए प्रति क्विंटल का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
गोंदिया जिला मार्केटिंग फेडरेशन ने खरीफ सीजन के लिए 154 धान खरीद केंद्र मंजूर किए हैं और इन धान खरीदी केंद्रों से पंजीकरण प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। किसानों ने धान बेचने के लिए पंजीयन कराना शुरू किया है। हालांकि धान पंजीयन की डेडलाइन 30 नवंबर तक है, लेकिन पंजीयन के लिए समय बढ़ने की भी संभावना है।
किसान आने वाली रबी सीजन की तैयारी के लिए हल्के धान की जल्दी कटाई और चुराई करके उसे बेच देते हैं। लेकिन इस साल, जब खरीफ में हल्के धान की कटाई चल रही है, अक्टूबर में लगातार आठ दिनों तक बेमौसम बारिश हुई। किसानों को प्राकृतिक संकट के बाद दूसरे संकट का सामना करने का समय है।
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खरीफ फसल के महत्वपूर्ण आकड़ें
- जिले में धान खरीदी केंद्र : 154 केंद्र
- धान पंजीयन की अंतिम तिथि : 30 नवंबर
- कृषि प्रभावित क्षेत्र : 49,844 हेक्टेयर
- आर्थिक नुकसान: 78 करोड़ रुपये
- प्रभावित किसान : 1.23 लाख
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निजी व्यापारियों के गोदाम फुल
सरकारी धान खरीदी केंद्र पर पंजीयन प्रक्रिया अभी भी चल रही है। असल में, धान की खरीदी शुरू होने में अभी दस से पंद्रह दिन और लगने की संभावना है। लेकिन, किसान रबी की तैयारी कर रहे हैं और उन्हें कर्ज और रबी की फसलों के लिए पैसे की जरूरत है, इसलिए वे निजी व्यापारियों को कम दाम पर धान बेच रहे हैं।
निजी व्यापारियों के गोदाम फुल हो गए हैं और उम्मीद है कि इन गोदामों से धान सरकारी धान खरीदी केंद्र तक पहुंच जाएगा। पहले से ही प्राकृतिक आफतों से परेशान किसानों को प्रशासन की बनावटी नीतियों का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। इस वजह से किसानों में रोष हैं।
