

Highlights:
राजगुड़ा, सलंगटोला, मंदीटोला, बड़ा मोगरा और छोटा मोगरा में महिलाओं ने शराबबंदी के लिए रैली निकाली।
महिला बचत समूहों, ग्राम पंचायत पदाधिकारियों और ग्रामीणों ने जनजागरण अभियान में भाग लिया।
शराब की लत से होने वाली मारपीट, आर्थिक परेशानी और पारिवारिक विवादों को रोकना अभियान का प्रमुख उद्देश्य है।
Gondia Women Awareness Rally: गोंदिया जिले के सड़क अर्जुनी तहसील के राजगुड़ा ग्राम पंचायत अंतर्गत आने वाले राजगुड़ा, सलंगटोला, मंदीटोला, बड़ा मोगरा और छोटा मोगरा इन पांच गांवों में शराबबंदी के लिए महिलाओं ने एकजुट होकर जनजागरण अभियान चलाया। महिला बचत समूहों की सदस्यों, ग्राम पंचायत पदाधिकारियों और ग्रामीणों की बड़ी भागीदारी में भव्य रैली निकाली गई। इस दौरान शराबबंदी के विरोध में नारे लगाकर नागरिकों से नशे से दूर रहने और गांव में शराब बिक्री बंद करने की अपील की गई।
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, इन पांच गांवों की कुल आबादी करीब दो हजार है। गांवों में कुछ दुकानदारों द्वारा शराब बेचे जाने की पृष्ठभूमि में महिलाओं ने यह पहल की। शराब की लत से होने वाली घरेलू हिंसा, आर्थिक परेशानियों और सामाजिक समस्याओं पर अंकुश लगाकर गांवों में शांतिपूर्ण वातावरण बनाना इस अभियान का उद्देश्य है। मुख्यमंत्री समृद्ध पंचायत राज अभियान 2026-27 के तहत यह उपक्रम चलाया गया। ग्राम पंचायत पदाधिकारी लेखलाल टेकाम ने कहा कि गांव के कई युवाओं की शादी की उम्र हो गई है और परिवारों में लड़के-लड़कियों के रिश्ते तलाशने की प्रक्रिया शुरू है।
ऐसे में यदि युवा अभी से शराब के आदी हो गए, तो उनके विवाह और भविष्य पर भी असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज सहित अन्य समाजों के युवाओं को भी नशे से दूर रखना जरूरी है। टेकाम ने दावा किया कि गांव में नौ लोग शराब बेचते हैं और उनसे शराब बिक्री बंद करने की अपील की।
इस अवसर पर शांता संयम, अरुण लेदे, वर्षा लाडे, अनिता लेदे, देवानंद गेडाम, रंजू पटने, पुष्पमाला पंचभाई, शिल्पा मेश्राम, सीमा घासले, पुरणलाल कोडापे, डी.एच.पटने, सरपंच सुषमा मरस्कोल्हे, उपसरपंच लेखलाल टेकाम, संघपाल वैद्य, लिकु मडावी, लता कडपते, कुंदा पटने, सीमा पटने सहित ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
उमेद ग्राम सखी रेखा लेदे ने कहा कि शराब पीकर पुरुष घर आते हैं और शराब पीने के लिए पैसे नहीं होने पर घर की जरूरी वस्तुएं तक बेच देते हैं। नशे में पत्नी और बच्चों के साथ मारपीट की जाती है। इससे परिवार बिखर रहे हैं और महिलाओं व बच्चों को परेशानी उठानी पड़ रही है। इस स्थिति को बदलने के लिए उमेद समूह और ग्रामस्थ महिलाओं ने एकजुट होकर रैली निकाली और गांवों में शराबबंदी के लिए पहल की।
गांव के युवाओं की शादी की उम्र लड़के-लड़कियों के रिश्ते तलाशे जा रहे हैं। ऐसे में यदि युवा अभी से शराब के आदी हो जाएंगे, तो उन्हें शादी के लिए लड़कियां कौन देगा? आदिवासी समाज सहित अन्य समाजों के युवाओं का भविष्य सुरक्षित रखने के लिए शराबबंदी जरूरी है, गांव में नौ लोग शराब बेच रहे हैं। उन्हें शराब की बिक्री बंद करनी चाहिए।