चुनाव प्रचार (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Political Campaign Noise: गोंदिया नगर परिषद चुनाव में प्रचार के दौरान ज्यादा प्रचार से शहर में होने वाले ध्वनिप्रदूषण को रोकने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को कंट्रोल करने के लिए कर्मचारियों को खास निर्देश दिए गए हैं। रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच लाउडस्पीकर, डीजे या प्रचार लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक है।
साथ ही, वाहन चलने पर भी लाउडस्पीकर का इस्तेमाल मना है, और घोषणा तभी किया जा सकता है जब वाहन एक तय जगह पर खड़ा हो। नियमों का उल्लंघन करने पर पुलिस को सीधी कार्रवाई करने का अधिकार दिया गया है। इसमें संबंधित वाहन को जब्त करना, कार्यक्रम को रोकना, आयोजक के खिलाफ मामला दर्ज करना, लाइसेंस रद्द करना और आगे के कार्यक्रम के लिए लाइसेंस देने से मना करना शामिल होगा। किसी भी लाउडस्पीकर के लिए पुलिस से लिखित अनुमति लेना जरूरी है।
अस्पतालों, स्कूलों और न्यायालय परिसर ‘साइलेंट जोन’ घोषित किया गया है, 55 डेसिबल से ज्यादा शोर करना जुर्म होगा। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि नागरिकों की शांति भंग करने वाली नारेबाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी पार्टियों और कार्यकर्ताओं से नियमों का उल्लंघन न करने की अपील की गई है। उम्मीदवारों को भी खास सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
उम्मीदवारों की दी हुई प्रचार वाहन लाउडस्पीकर बजाते हुए शहर में निकल रही हैं। चुनाव विभाग ने नियम और शर्तें तो लगाई हैं, कई वाहनों पर जोर-जोर से लाउडस्पीकर बजाए जा रहे है। सड़कों पर घूमते लाउडस्पीकर से लोग परेशान हैं। पब्लिक जगहों पर भी प्रचार वाहनों पर लगे लाउडस्पीकर नियम तोड़ते दिख रहे हैं। इस सब पर कंट्रोल करने का कोई सिस्टम नहीं दिख रहा है।
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प्रचार के दौरान चुनावी रैलियां आयोजित की जाती हैं। इस प्रकार के प्रदर्शन से आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की संभावना रहती है। वहीं पर्यावरण भी प्रदूषित होता है और जन जीवन पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके अतिरिक्त लाउडस्पीकरों और ध्वनि विस्तार के अन्य साधनों के अधिकतम प्रयोग से भी आम जनमानस की शांति भंग होती है।
– राजेंद्र सीताराम गुप्ता, प्रमुख व्यवसायी
राजनीतिक दलों को चुनाव प्रचार के दौरान इस्तेमाल होने वाले वाहनों और लाउडस्पीकर के उचित प्रयोग के लिए प्रेरित करें ताकि किसी भी प्रकार के प्रदूषण पर नियंत्रण किया जा सके। वहीं पुलिस विभाग भी वाहनों की प्रदूषण और आवश्यक प्रमाण पत्र आदि की भी जांच करें। नियमानुसार कार्रवाई भी करें तो बेहतर होगा।
– दलजीत बग्गा, व्यवसायी