डव्वा बस स्टॉप पर एसटी समय सारणी न होने से यात्रियों को परेशानी
अकोला के डव्वा बस स्टॉप पर एसटी बस की समय सारणी का अभाव यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। प्रशासन से समाधान की मांग।
Gondia News: सड़क अर्जुनी तहसील के डव्वा में यात्री बस स्टॉप पर एसटी बस की समय सारणी नहीं होने के कारण यात्रियों को परेशानी हो रही है. मांग की जा रही है कि डीपो प्रमुख इस ओर ध्यान दें और समय सारिणी की सुविधा उपलब्ध कराएं.
डव्वा ग्राम यह गोंदियानागपुर मार्ग पर है और वहां एक बस स्टैंड है. यहां क्षेत्र के जांभडी, दोड़के, पलसगांव, भुसारीटोला, पाटेकुर्रा, खाडीपार, घोटी, घटेगांव, चिरचाड़ी, म्हसवानी आदि गांवों के निवासी डव्वा बस स्टैंड से ही बस से सफर करते हैं. लेकिन बस स्टैंड पर एसटी निगम की बस समय सारिणी प्रदर्शित नहीं होने से यात्रियों को परेशानी हो रही है.
मवेशियों का करे बंदोबस्त गोरेगांव, त.सं. शहर में मवेशियों की संख्या दिनोंदिन बढ़ रही है. ऐसे में इन मवेशियों ने गोरेगांवगोंदिया राष्ट्रीय महामार्ग पर अपना कब्जा जमा रखा है. जिसके चलते अनेक समस्या निर्माण हो रही है.
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एक ओर यातायात में लगातार बाधा उत्पन्न हो रही है वहीं शहर में व्यापारी वर्ग भी इन आवारा मवेशियों से परेशान हैं. साथ ही सड़क पर दुर्घटनाओं का खतरा मंडरा रहा है. लेकिन इस विषय पर प्रशासन लगातार अनदेखी कर रहा है.
होर्डिंग्स से हो रही है दुर्घटनाएं गोंदिया का. शहर के कई हिस्सों में अनाधिकृत होर्डिंग और बैनर की तस्वीरें दिखाई दे रही है. जन्मदिन, जयंती, समारोह, उद्घाटन, शैक्षणिक कक्षाओं सहित किसी भी कारण से होर्डिंग लगाना चलन बन गया है.
जिससे कई स्थानों पर यातायात बाधित हो रहा है और वाहन चालकों की नजर इन होर्डिंग्स पर जाने से दुर्घटनाएं भी हो रही हैं. यदि नगर परिषद सीमा के भीतर कहीं भी किसी भी प्रकार के होर्डिंग्स लगाए जाने हैं तो नगर परिषद के विज्ञापन विभाग की अनुमति अनिवार्य है.
खेती पर आधारित उद्योग संकट मेंगोंदिया का. किसानों का आर्थिक उत्थान साधने के लिए खेती व्यवसाय को प्रोत्साहन व गति देने शासन के माध्यम से विभिन्न उपक्रम, योजना क्रियान्वित की जाती है. लेकिन उस पर उचित क्रियान्वयन नही होने तथा दुर्गम क्षेत्रों के किसानों तक योजना नहीं पहुंचने आदि कारणों से खेती पर आधारित उद्योग संकट में है.
आर्थिक स्थिति में सुधार के साथ ही किसानों का विकास साधने के लिए खेती पूरक व्यवसाय पर जोर दिया जाता है. लेकिन मुर्गी पालन व्यवसाय, बकरी पालन, संकरित गाय व भैंसे पालन आदि खेती पूरक व्यवसाय केवल नाम के लिए रह गया है. जबकि उसमें वृध्दि करने के लिए सभी स्तर पर प्रयास होना जरूरी है.
