Gondia News: गोंदिया में समाज में बड़े पैमाने पर अशिक्षा, गरीबी, कम उम्र में शादी करने की प्रथा और जाति व्यवस्था के कारण बाल विवाह की दर बढ़ रही है। भारतीय संस्कृति में विवाह यह समाज में एक महत्वपूर्ण और सार्वजनिक सामाजिक गतिविधि है।
अक्षय तृतीया के अवसर पर सामुदायिक और व्यक्तिगत दोनों तरह के विवाह समारोह आयोजित किए जाते हैं। बड़े पैमाने पर बाल विवाह होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। इस साल अक्षय तृतीया 19 अप्रैल को है, और इस दिन को शुभ मानते हुए, इस समय बड़े पैमाने पर बाल विवाह होने की भी संभावना रहती है।
महिला व बाल विकास मंत्रालय, मुंबई द्वारा 3 जून 2013 को जारी की गई अधिसूचना और बाल विवाह रोकथाम अधिनियम, 2006 2007 की धारा 16 के सबसेक्शन 1 और 3 के अनुसार, ग्राम पंचायत स्तर पर बाल विवाह प्रकल्प अधिकारी नागरी और प्रकल्प के तहत नियुक्त आंगनवाड़ी पर्यवेक्षक और संबंधित ग्राम पंचायत के ग्राम सेवकों को बाल विवाह रोकथाम अधिकारी घोषित किया गया है।
साथ ही, आंगनवाड़ी सेविकाओं को सहायक बाल विवाह रोकथाम अधिकारी घोषित किया गया है।बाल विह रोकने की अपील बाल विवाह को रोकने और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए और ज्यादा असरदार कोशिशें करना जरूरी है। हर अच्छे नागरिक को अक्षय तृतीया या दूसरे मौकों पर बाल विवाह रोकने के लिए सावधानी बरतनी चाहिए।
18 साल से कम उम्र की लड़की और 21 साल से कम उम्र के लड़के की शादी करना जुर्म है। बाल विवाह एक जुर्म है और बाल विवाह प्रतिबंधक अधिनियम 2006 के तहत, बाल विवाह करने वाले और इसे करवाने वाले को दो साल तक की जेल और 1 लाख रु। तक का जुर्माना हो सकता है।
बाल विवाह कानूनन जुर्मयदि किसी गांव में बाल विवाह हो रहा है या बाल विवाह की जानकारी मिलते ही, जिला महिला व बाल विकास अधिकारी कार्यालय के तहत जिला बाल संरक्षण कक्ष, गोंदिया, साथ ही चाइल्ड हेल्प लाइन 1098 टोल फ्री नंबर अथवा पास के पुलिस स्टेशन में जानकारी दी जाए। बच्चों के क्षेत्र में काम करने वाली अलगअलग यंत्रणाओं के साथसाथ आम नागरिक को भी ध्यान रखना होगा कि अक्षय तृतीया के दिन बाल विवाह न हो।
बाल विवाह कानून के तहत एक जुर्म है और अगर मौजूदा रीतिरिवाजों और परंपराओं के अनुसार बाल विवाह नहीं करते हैं, तो बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के प्रावधानों के तहत सजा के हकदार होंगे। यह अपील जिला महिला व बाल विकास अधिकारी तुषार पौनीकर ने की है।