Gondia News: गोंदिया-भंडारा के माथाडी कामगारों ने खोला मोर्चा, न्यूनतम वेतन और 8 घंटे काम की मांग

Mathadi Workers Protest: गोंदिया-भंडारा के माथाडी कामगारों ने लंबित मांगों को लेकर धरना दिया। न्यूनतम वेतन, 8 घंटे काम, श्रमिक सुविधाएं और रिक्त पद भरने की मांग की गई।
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माथाडी कामगार आंदोलन (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Bharatiya Mazdoor Sangh Gondia: गोंदिया व भंडारा जिले के माथाडी कामगारों सहित विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिकों की लंबित मांगों का तत्काल निराकरण करने की मांग को लेकर भारतीय मजदूर संघ की ओर से जिलाधीश कार्यालय के सामने धरना आंदोलन किया गया। मांगों पर तत्काल निर्णय नहीं होने पर आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी संघ की ओर से दी गई।

आंदोलनकारियों ने गोंदिया-भंडारा जिला माथाडी हमाल व असंरक्षित कामगार मंडल में निरीक्षकों के रिक्त पद तत्काल भरने, गोंदिया जिले की राइस मिलों में कार्यरत श्रमिकों को न्यूनतम वेतन के अनुसार वेतन देने, काम के घंटे आठ घंटे निर्धारित करने तथा अन्य श्रमिक सुविधाएं लागू करने की मांग की। इसके अलावा राइस मिल व सरकारी गोदामों में कार्यरत हमाल श्रमिकों को माथाडी मंडल में शामिल करने, सुरक्षा रक्षक मंडल के कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि करने तथा सेवानिवृत्ति की आयु 58 से बढ़ाकर 60 वर्ष करने की मांग की गई।

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निरीक्षकों के रिक्त पद भरने और वेतन बढ़ाने की मांग

ग्रामीण अस्पतालों में कार्यरत सुरक्षा रक्षकों को नियमित मासिक वेतन देने की मांग भी रखी गई। आंदोलनकारियों ने राज्य में एक ही महामंडल शुरू करने, मृत गटसचिवों के वारिसों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने तथा विभिन्न कार्यकारी व आदिवासी सेवा सहकारी संस्थाओं में कार्यरत शिपाई, ग्रेडर और ऑपरेटरों को श्रम कानून के अनुसार न्यूनतम वेतन देने की मांग की। धरना आंदोलन के बाद मांगों का ज्ञापन जिलाधीश मंदार पत्की को सौंपा गया। इस अवसर पर भारतीय मजदूर संघ के जिलाध्यक्ष अशोक गोंधर्व, सचिव राजेश सोनवाने सहित पदाधिकारी व कामगार उपस्थित थे।

स्वास्थ्य बीमा का मुद्दा भी उठाया

महिला आर्थिक विकास महामंडल (माविम) में कार्यरत सीएमआरसी कर्मचारियों की पीएफ कटौती कर उन्हें स्वास्थ्य बीमा सुविधा देने की मांग की गई। साथ ही सीएमआरसी को प्रबंधन खर्च उपलब्ध कराने, माविम बचत समूहों को 30 हजार रु. की घुमंतू निधि देने तथा जिला स्तरीय प्रेरकों को प्रतिमाह 3 हजार रु। मानधन देने की मांग रखी गई। माविम लोकसंचालित साधन केंद्रों के लिए वार्षिक प्रशासनिक खर्च का प्रावधान करने तथा उमेद के तहत महिला बचत समूहों को मिलने वाली सभी सुविधाएं माविम के बचत समूहों को भी उपलब्ध कराने की मांग आंदोलनकारियों ने की।

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