गोंदिया-बल्लारशाह रेलमार्ग का देवलगांव रेलवे फाटक बना बड़ी मुसीबत, 24 घंटे में 35 बार बंद होने से जनता बेहाल
Gondia Ballarshah Railway: गोंदिया-बल्लारशाह रेलमार्ग पर स्थित देवलगांव रेलवे फाटक 24 घंटे में 35 बार बंद होने से एम्बुलेंस और छात्र रोजाना जाम में फंस रहे हैं। नागरिक अब ओवरब्रिज की मांग कर रहे हैं।
- Written By: केतकी मोडक
देवलगांव रेलवे फाटक जाम प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - सोशल मीडिया)
Gondia Ballarshah Railway Gate Issue: गोंदिया-बल्लारशाह ब्रॉडगेज रेलमार्ग पर स्थित देवलगांव (नवेगांवबांध) रेलवे फाटक क्षेत्र के हजारों लोगों के लिए रोजाना परेशानी का कारण बन गया है। बदलते समय के साथ जहां परिवहन और रेल सेवाओं का विस्तार हुआ है, वहीं इस रेलवे फाटक की समस्या वर्षों से जस की तस बनी हुई है।
कभी दिन में 1-2 बार बंद होने वाला फाटक अब 24 घंटे में लगभग 30 से 35 बार बंद होता है, जिससे आम नागरिकों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों और व्यापारियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। फाटक बंद होते ही सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं।
हर बार 15 मिनट का ब्रेक, मीलों लंबा जाम
प्रत्येक बार करीब 10 से 15 मिनट तक यातायात पूरी तरह ठप रहता है। इस दौरान दोपहिया, चारपहिया, मालवाहक वाहन और पैदल यात्री सभी को मजबूरन इंतजार करना पड़ता है। गर्मी, बारिश या ठंड जैसे मौसम की परवाह किए बिना लोगों को घंटों का समय केवल रेलवे फाटक खुलने की प्रतीक्षा में गंवाना पड़ता है। रेलवे फाटक बार-बार बंद रहने से सबसे अधिक परेशानी आपातकालीन सेवाओं को होती है।
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कई बार एम्बुलेंस भी फाटक के दोनों ओर फंस जाती हैं, जिससे मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा, स्कूल और कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों तथा नौकरीपेशा लोगों को भी रोज देर होने की समस्या उठानी पड़ती है। लगातार लगने वाले जाम से ईंधन की बर्बादी और प्रदूषण भी बढ़ रहा है। स्थानीय नागरिक लंबे समय से इस रेलवे फाटक पर स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।
तत्काल पहल करने की मांग
नवेगांवबांध क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है। क्षेत्र के लोगों ने सांसद, विधायक और संबंधित विभागों से इस दिशा में तत्काल पहल करने की मांग की है, ताकि रोजाना होने वाली परेशानी से लोगों को राहत मिल सके।
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उनका मानना है कि बढ़ती रेल आवाजाही को देखते हुए अब केवल अस्थायी उपाय पर्याप्त नहीं होंगे। लगातार बढ़ती ट्रेनों की संख्या और रोज लगने वाले जाम से लोगों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नागरिकों का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते ओवरब्रिज या अंडरपास निर्माण को मंजूरी नहीं दी, तो जनआक्रोश बढ़ सकता है।
क्षेत्र के विकास और सुरक्षित, सुगम यातायात के लिए अब इस लंबे समय से लंबित समस्या का स्थायी समाधान निकालना बेहद आवश्यक हो गया है। ओवरब्रिज या अंडरपास का निर्माण ही इस समस्या का एकमात्र प्रभावी समाधान है। कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के समक्ष यह मांग रखी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
