मनरेगा मजूरी को लेकर मजदूरों में निराशा, 312 रुपये में कैसे चलेगा घर सरकार से तीखा सवाल
महंगाई के बीच मनरेगा मजदूरी में बढ़ोतरी न होने से ग्रामीण मजदूरों में निराशा है। 312 रुपये में कैसे चलेगा घर? जानें पूरी खबर।
Gondia News: एक ओर महंगाई चरम पर है और आवश्यक वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण मजदूरों के पसीने की कीमत जस की तस बनी हुई है. इस वर्ष एक अप्रैल को केंद्र सरकार द्वारा हर वर्ष मनरेगा मजदूरी में की जाने वाली बढ़ोतरी पर रोक लगाने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले मजदूर वर्ग में गहरी निराशा है. सिर्फ 312 रु. में कोई कैसे गुजारा कर सकता है, यह सवाल अब जिले के हर कोने से उठ रहा है. एक तरफ महंगाई बढ़ गई है, और जरूरी चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण मजदूरों को अपनी मेहनत की जो कीमत चुकानी पड़ती है, वह वैसी ही है.
केंद्र सरकार ने हर साल 1 अप्रैल को होने वाली मनरेगा मजदूरी में बढ़ोतरी को इस साल रोक दिया है, जिससे गांव की आर्थिक रीढ़ माने जाने वाले मजदूरों को बहुत निराशा हुई है. सिर्फ 312 रु. में कोई कैसे गुजारा कर सकता है, यह रोष वाला सवाल अब उठ रहा है.
महंगाई से कैसे बचें बाजार में तेल, दाल और गैस सिलेंडर की कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं. एक मजदूर जो हर दिन 312 रु. कमाता है, उसके पास एक महीने काम करने के बाद भी बहुत कम पैसे हैं. इतने पैसे में अपने बच्चों की पढ़ाई, इलाज और रोज के खर्चे पूरे करना नामुमकिन हो गया है.
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इस वर्ष 1 रु. की भी बढ़ोतरी नहीं पिछले कई वर्षों से नया वित्तीय वर्ष शुरू होने पर एक अप्रैल को मजदूरी दरें बढ़ा दी जाती थीं. हालांकि, साल 202627 के लिए केंद्र सरकार ने वेतन में एक पैसा भी नहीं बढ़ाया है. आज भी मजदूरों को पुरानी दर यानी 312 रु. प्रतिदिन पर ही काम करना पड़ता है.
मस्टर लॉक, मजदूर के हाथ खाली कई ग्राम पंचायतों में प्रशासनिक कारणों और कुछ तकनीकी खामियों के कारण ईमस्टर लॉक हो गए हैं. ऐसे में मजदूरों को खाली हाथ रहना पड़ता है क्योंकि उन्हें मजदूरी मांगने के बाद भी मस्टर राशि उपलब्ध नहीं कराई जाती है.
20000 इस वर्ष रबी धान के रकबे में वृद्धि 73,790 हेक्टेयर में खेती, गोंदिया, अर्जुनी मोरगांव तहसील आगेगोंदिया तहसील में रोपाई हेक्टेयर में 16,510 अर्जुनी मोरगांव तहसील में रोपाई हे. में 13,995 देवरी तहसील में रोपाई हेक्टेयर में 3,484 गोंदिया, ब्यूरो. पिछले खरीफ सीजन में बेमौसम बारिश के कारण किसानों को आर्थिक नुकसान हुआ था और धान की फसल को कीटव्याधि के कारण काफी नुकसान हुआ था.
इसलिए जिले के किसानों ने इस वर्ष गर्मी के मौसम में खरीफ की भरपाई के लिए 73 हजार हेक्टेयर में रबी धान की रोपाई की है. जिसमें गोंदिया और मोरगांव दो तहसील सबसे आगे हैं. जिले का सामान्य रबी क्षेत्रफल 66 हजार हेक्टेयर है. कम से कम इस क्षेत्र में रबी धान की खेती की उम्मीद रहती है. लेकिन, इस वर्ष 73,790 हेक्टेयर क्षेत्र में रबी धान की खेती की गई है.
सबसे ज्यादा रोपाई गोंदिया तहसील में 16,510 हेक्टेयर और अर्जुनी मोरगांव तहसील में 13,995 हेक्टेयर की गई है. बताया गया है कि जिले के किसानों के पास सिंचाई की सुविधा होने से इस वर्ष रबी धान की खेती का रकबा बढ़ गया है. पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष रबी धान की खेती का रकबा 9 हजार हेक्टेयर बढ़ गया है.
देवरी तहसील में सबसे कम रोपाई जिले में इस वर्ष सबसे कम रबी धान देवरी तहसील में लगाया गया है. इस तहसील में 3,484 हेक्टेयर पर धान की खेती की गई है, जबकि बाकी तहसील में खेती का रकबा 6 हजार हेक्टेयर पर है.
एकल फसल से भूमि पर प्रभाव लगातार एक ही प्रकार की फसल उगाने से मिट्टी पर बुरा प्रभाव पड़ता है और मिट्टी की उर्वरता दिनबदिन कम होती जा रही है. इसलिए, धान की फसल की जगह कम पानी वाली मक्का और फलों की फसलें लगाएं, ऐसी सलाह जिले के किसानों को जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी नीलेश कानवड़े ने दी है.
