मौसम केंद्र के लिए 512 ग्राम पंचायतों का चयन, गांव में ही मौसम का सटीक रिकॉर्ड होगा दर्ज

Gondia Latest News: भारत सरकार के कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने जुलाई 2023 में 'वेदर इन्फॉर्मेशन नेटवर्क एंड डेटा सिस्टीम' प्रकल्प शुरू की थी। अब गोंदिया जिले के गांव इसका हिस्सा बनने जा रहे है।
Gondia Latest News: भारत सरकार के कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने जुलाई 2023 में 'वेदर इन्फॉर्मेशन नेटवर्क एंड डेटा सिस्टीम' प्रकल्प शुरू की थी। अब गोंदिया जिले के गांव इसका हिस्सा बनने जा रहे है।
मौसम सूचना केन्द्र प्रणाली (सौजन्य-नवभारत)
Updated on

Gondia News: प्राकृतिक आपदाओं के दौरान नागरिकों और किसानों को सटीक जानकारी प्रदान करने के लिए केंद्र शासन के मार्गदर्शन में कृषि विभाग की ओर से 'वेदर इन्फॉर्मेशन नेटवर्क एंड डेटा सिस्टीम' नामक एक महत्वाकांक्षी पहल का क्रियान्वयन किया जा रहा है। लेकिन, 'महावेध' प्रकल्प के तहत जिले में केवल 41 राजस्व मंडलों में स्वचालित मौसम केंद्र स्थापित किए गए हैं और उनमें से तीन बंद हैं।

वहीं अब 512 ग्राम पंचायतों में मौसम केंद्र स्थापित किए जाने हैं। भारत सरकार के कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने जुलाई 2023 में 'वेदर इन्फॉर्मेशन नेटवर्क एंड डेटा सिस्टीम' प्रकल्प शुरू की थी। इसका उद्देश्य देश भर में मौसम के आंकड़ों में कमी को पूरा करना और किसानों को अति-स्थानीय मौसम की जानकारी प्रदान करना था।

41 राजस्व मंडलों में केंद्र स्थापित

इसमें यह जिला भी शामिल है। जिले के 41 राजस्व मंडलों में स्वचालित मौसम केंद्र स्थापित किए गए हैं। इनमें से तीन कैंट क्षेत्र में हैं। 512 ग्राम पंचायतों में 'वेदर इन्फॉर्मेशन नेटवर्क एंड डेटा सिस्टीम' स्थापित किए जाने हैं। इसके लिए 512 ग्राम पंचायतों का चयन भी कर लिया गया है और स्थान निर्धारित कर प्रस्ताव राज्य सरकार को भेज दिया गया है।

गांव में ही मौसम का सटीक रिकॉर्ड होगा

बारिश एक निश्चित स्थान पर गिरती है। प्रशासन को अक्सर इसकी सूचना देर से मिलती है। इस वजह से किसानों को कोई मदद नहीं मिल पाती। लेकिन, यह स्वचालित मौसम केंद्र गांव में ही वर्षा माप, हवा की गति और दिशा, तापमान में बदलाव, ठंड की तीव्रता और आर्द्रता का रिकॉर्ड रखेगा, जिससे किसानों को लाभ होगा।

किसानों को मोबाइल के जरिए मिलेगी जानकारी

ये केंद्र सैटेलाइट और इंटरनेट कनेक्टिविटी के आधार पर जानकारी एकत्र करके सीधे केंद्रीय सर्वर पर भेजेंगे। इसके बाद, विशेषज्ञों द्वारा इस जानकारी का विश्लेषण करके एसएमएस, मोबाइल ऐप और स्थानीय प्रणालियों के माध्यम से किसानों तक पहुंचाया जाएगा।

Navbharat Live
navbharatlive.com