क्या आंकड़ों के खेल में कांग्रेस दे पाएगी भाजपा को मात? 976 मतदाताओं वाली विधान परिषद सीट पर राजनीतिक घमासान
MLC Election: वर्धा-चंद्रपुर-गड़चिरोली स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद चुनाव में भाजपा के अरुण लखानी और कांग्रेस के शैलेश अग्रवाल के बीच मुकाबला बेहद रोचक हो गया है।
- Written By: केतकी मोडक
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - सोशल मिडिया)
Wardha Chandrapur Gadchiroli MLC Election: वर्धा-चंद्रपुर-गडचिरोली स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र की विधान परिषद चुनावी जंग अब बेहद दिलचस्प और रोचक मोड़ पर पहुंच गई है। इस बार का यह मुकाबला केवल कागजी संख्याबल का नहीं, बल्कि पर्दे के पीछे की राजनीतिक रणनीति, जमीनी संपर्क और वोटों के सटीक व प्रभावी प्रबंधन पर निर्भर दिखाई दे रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने इस बार बड़े उद्योगपति अरुण लखानी को अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाकर इस चुनाव को अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना दिया है।
दूसरी ओर, कांग्रेस ने भी बड़ा दांव खेलते हुए वर्धा के जाने-माने उद्योगपति शैलेश अग्रवाल पर भरोसा जताया है। दो बड़े चेहरों के आमने-सामने आने से यह चुनाव दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों के लिए कड़ी परीक्षा और चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
2018 के चुनावी नतीजों ने बढ़ा दी है भाजपा की चिंता
राजनीतिक समीकरणों पर नजर डालें तो वर्ष 2018 के पिछले चुनाव में भाजपा के पास स्पष्ट और मजबूत बहुमत होने के बावजूद उसे जैसी अपेक्षित एकतरफा जीत मिलनी चाहिए थी, वैसी नहीं मिल सकी थी। उस समय भाजपा के अधिकृत उम्मीदवार रामदास आंबटकर को 528 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस के प्रत्याशी इंद्रकुमार सराफ ने 492 वोट हासिल कर अंतिम दौर तक कड़ी टक्कर दी थी। महज 37 वोटों के बेहद मामूली अंतर से मिली वह जीत भाजपा के लिए एक बड़ी राजनीतिक चेतावनी मानी गई थी।
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जानकारों के अनुसार, उस समय भाजपा को कांग्रेस समर्थक और कुछ निर्दलीय स्थानीय निकाय सदस्यों का अंदरूनी समर्थन मिलने की भारी चर्चा थी, लेकिन जब मतदान हुआ तो उसका अपेक्षित लाभ पार्टी को नहीं मिल सका। यही वजह है कि इस बार भी भाजपा की पूरी उम्मीदें अपने सहयोगी दलों और निर्दलीय सदस्यों के मतों को सहेजने पर टिकी हुई हैं। यदि इन वोटों में थोड़ा भी बिखराव या विभाजन हुआ, तो चुनाव का पूरा समीकरण पलट सकता है।
चंद्रपुर-गड़चिरोली में कांग्रेस का पलड़ा भारी; आंकड़ों का गणित उलझा
चुनावी विश्लेषकों के मुताबिक, चंद्रपुर जिले में कांग्रेस के पास लगभग 200 से अधिक ठोस मतदाता (नगर परिषद, जिला परिषद सदस्य आदि) होने के कारण वहां पार्टी की स्थिति अपेक्षाकृत काफी मजबूत मानी जा रही है। वहीं, गड़चिरोली जिले में भी महाविकास अघाड़ी और महायुति के बीच का मुकाबला पूरी तरह एकतरफा नहीं दिख रहा, जिससे कांग्रेस खेमे में उत्साह का माहौल है।
वर्तमान में अगर तीनों जिलों के कुल वोट बैंक के आंकड़ों को देखा जाए, तो 84 मनोनीत और 892 निर्वाचित सदस्यों सहित कुल मतदाताओं में:
- भाजपा गठबंधन के पास: लगभग 385 वोट हैं।
- कांग्रेस गठबंधन के खाते में: करीब 323 वोट दिखाई दे रहे हैं।
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समर्थकों को एकजुट रखना भाजपा के लिए सबसे बड़ी परीक्षा
राजनीतिक जानकारों का साफ मानना है कि इस चुनाव में सत्तारूढ़ भाजपा के सामने केवल विपक्षी कांग्रेस को हराने की चुनौती नहीं है, बल्कि अपने ही कुनबे और समर्थक वोट बैंक को क्रॉस-वोटिंग से बचाकर एकजुट रखना सबसे बड़ी परीक्षा है। दूसरी तरफ, कांग्रेस भी इस बार बेहद आक्रामक रुख अपनाए हुए है। वह सहयोगी दलों और नाराज निर्दलीय सदस्यों के समर्थन से इस पूरे मुकाबले को और अधिक रोमांचक तथा अपने पक्ष में मोड़ने की पुरजोर कोशिश कर रही है।
ऐसे में यह साफ है कि वर्धा-चंद्रपुर-गडचिरोली विधान परिषद चुनाव में जीत का सेहरा किसके सिर बंधेगा, यह केवल शुरुआती आंकड़ों से तय नहीं होगा, बल्कि जो दल आखिरी रात तक प्रभावी और सटीक राजनीतिक प्रबंधन (पॉलिटिकल मैनेजमेंट) करने में सफल रहेगा, बाजी उसी के हाथ लगेगी।
