गड़चिरोली: संसद में गूंजा चामोर्शी भूमि अधिग्रहण मुद्दा, किसानों को न्याय की मांग

गड़चिरोली में किसानों के हितों की रक्षा के लिए सांसद डा. किरसान ने उठाई आवाज, भूमि अधिग्रहण पर चिंता।
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Gadchiroli Farmers News: गड़चिरोली जिले को स्टील हब के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से शुरू होने वाला जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया का मुद्दा संसद के बजट अधिवेशन में उपस्थित करते हुए गड़चिरोलीचिमूर लोस क्षेत्र के सांसद डा। नामदेव किरसान ने स्थानीय किसानों के हितों की रक्षा कर उन्हें न्याय देने की मांग केंद्र सरकार से की है।

इस दौरान कहा कि जिले में बड़े पैमाने पर औद्योगिक प्रकल्प निर्माण करने का नियोजन शुरू है, इसके लिए सुपीक खेत जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है। औद्योगिक कंपनियों के लिए बड़े पैमाने पर जमीन की आवश्यकता है।

इस दौरान कंपनियों को आवश्यक जमीन के तहत जयरामपुर व मुधोली तथा भेंडाला परिसर के करीब 14 गांवों के खेत जमीन की गिनती शुरू की गई है। जिले का करीब 78 से 80 प्रश क्षेत्र वन संपन्न है। बाकी बची मर्यादित जमीन ही स्थानीय किसानों के जीवन यापन का प्रमुख साधन है।

यहीं जमीन प्रमुखता से धान फसलों के लिए उपयोगी होने से इन जमीनों का भूसंपादन करने पर किसानों की आजीविका पर गंभीर परिणाम होगा और वे भूमिहीन होने की संभावना है। इसके मद्देनजर स्थानीय किसान ग्रामीणों द्वारा अधिग्रहण प्रक्रिया के खिलाफ व्यापक नाराजगी व्यक्त हो रही है।

कामगारों के रोजगार पर भी संकट इस दौरान सांसद डा। किरसान ने कहा कि किसानों की जमीनों के साथ ही आष्टी के बिल्ट पेपर मिल कंपनी की ओर हस्तांतरित होने के बाद वहां के करीब 400 कामगारों के रोजगार पर अनिश्चितता का संकट निर्माण हुआ है। जिससे संबंधित कामगारों का रोजगार सुरक्षित रखें।

उद्योग के लिए बंजर जमीन का उपयोग करें इस दौरान सांसद डा। किरसान ने मांग करते हुए कहा कि किसानों की अनुमति के बगैर कोई भूसंपादन न करें, वहीं प्रभावित किसानों को बाजारभाव के अनुसार उचित न्याय व समाधान कारक मुआवजा दें।

सुपीक जमीन का संरक्षण कर उद्योग के लिए प्राथमिकता से बंजर तथा कम उपयुक्त जमीन का उपयोग करें, ऐसी भूमिका सांसद डा। किरसान ने संसद में रखी। जिले के विकास प्रक्रिया में किसानों के हक का समतोल बनाएं रखना आवश्यक है, सरकार इस ओर संवेदनशीलता से ध्यान देने की बात भी कही।

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