भामरागड़ की बेटी का कमाल: पैरा योद्धा लुब्धा ने 14वीं नेशनल जूडो चैंपियनशिप में लहराया जीत का परचम
Gadchiroli की बेटी लुब्धा खंडालकर ने राजस्थान में आयोजित 14वीं राष्ट्रीय पैरा जूडो चैंपियनशिप में स्वर्ण और कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। जानिए इस पैरा योद्धा के संघर्ष और सफलता की कहानी।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
लुब्धा खंडालकर ने नेशनल पैरा जूडो चैंपियनशिप में जीते स्वर्ण और कांस्य पदक, फोटो- सोशल मीडिया
14th National Para Judo Championship: राजस्थान के गंगानगर में आयोजित 14वीं राष्ट्रीय पैरा जूडो चैंपियनशिप में महाराष्ट्र की बेटी लुब्धा खंडालकर ने अपने शानदार प्रदर्शन से इतिहास रच दिया है। 19 से 23 दिसंबर 2025 तक चली इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में लुब्धा ने एक स्वर्ण और एक कांस्य पदक जीतकर न केवल गढ़चिरोली बल्कि पूरे प्रदेश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।
भामरागड़ तहसील के एक साधारण परिवार की लुब्धा खंडालकर वर्तमान में पीएमश्री जवाहर नवोदय विद्यालय, घोट में कक्षा 10वीं की छात्रा हैं। उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए 40 किलोग्राम भार वर्ग में ‘स्वर्ण पदक’ (Gold Medal) पर कब्जा जमाया। इसके अलावा, अपनी शारीरिक क्षमताओं को चुनौती देते हुए उन्होंने 46 किलोग्राम भार वर्ग में भी प्रतिस्पर्धा की और ‘कांस्य पदक’ (Bronze Medal) हासिल करने में सफलता पाई।
शून्य से शिखर तक का सफर
वर्ष 2021-22 से नवोदय विद्यालय में शिक्षा ग्रहण कर रही लुब्धा ने खेलों को अपना जुनून बना लिया है। एक सच्ची “पैरा योद्धा” की तरह उन्होंने विपरीत परिस्थितियों को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उनकी खेल प्रतिभा को देखते हुए उनका चयन पैरा एथलेटिक्स के लिए हुआ था। नवोदय विद्यालय समिति और आदित्य मेहता फाउंडेशन के सहयोग से उन्होंने हैदराबाद में कड़ा प्रशिक्षण लिया, जिसके बाद उन्होंने जूडो और आर्म रेसलिंग (पंजा कुश्ती) में विशेषज्ञता हासिल की।
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दिखा चुकी हैं दम
लुब्धा की सफलता का सिलसिला केवल जूडो तक सीमित नहीं है। इसी वर्ष मई महीने में दिल्ली में आयोजित एशियन पैरा आर्म रेसलिंग चैंपियनशिप में उन्होंने 35 से 60 किलोग्राम वर्ग में बाएं और दाएं हाथ की स्पर्धा में दो कांस्य पदक जीतकर देश का प्रतिनिधित्व किया था। अब राष्ट्रीय पैरा जूडो चैंपियनशिप में उनका दोहरा पदक प्रदर्शन राज्य के अन्य खिलाड़ियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गया है।
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उनकी इस ऐतिहासिक जीत पर नवोदय विद्यालय के शिक्षकों, खेल प्रेमियों और गढ़चिरोली के नागरिकों ने उन्हें ढेरों बधाईयाँ दी हैं। लुब्धा की यह उपलब्धि साबित करती है कि यदि इरादे मजबूत हों, तो शारीरिक अक्षमताएं कभी भी सफलता का मार्ग नहीं रोक सकतीं।
