गड़चिरोली: 10 साल से गांव वालों ने नहीं देखी ST बस, जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर; ग्रामीणों ने दी चेत
ST Bus Service: गड़चिरोली के सोमनूर परिसर में पिछले एक दशक से बस सेवा बंद है। बदहाल परिवहन व्यवस्था के कारण छात्र और मरीज परेशान हैं, जिससे गुस्साए ग्रामीणों ने अब उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
- Written By: आकाश मसने
ST बस (फाइल फोटो, सोशल मीडिया)
Sironcha-Somnur ST Bus Service Stopped: एक तरफ सरकार और प्रशासन द्वारा जिले का विकास करने का और आखिरी छोर पर बसे लोगों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, लेकिन दूसरी ओर आज भी गड़चिरोली जिले के दुर्गम और अतिदुर्गम क्षेत्र के नागरिक बुनियादी सुविधाओं के लिये तरसते दिखाई दे रहे हैं। ऐसा ही एक मामला जिले की आखिरी छोर पर बसी सिरोंचा तहसील के सोमनूर परिसर में सामने आया है।
गड़चिरोली जिले के सोमनूर परिसर के नागरिकों ने पिछले 9-10 वर्षों से ST बस नहीं देखी है। अचानक इस मार्ग की ST बस सेवा बंद किये जाने के कारण इलाके के नागरिकों को निजी वाहन और पैदल आवाजाही की नौबत आन पड़ी है। इसे लेकर लोग प्रशासन के खिलाफ तीव्र नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं।
पहले सिरोंचा-सोमनूर यह बससेवा शुरू थी। जिससे इस परिसर के नागरिकों को तहसील मुख्यालय या जिला मुख्यालय गड़चिरोली में आवागमन करने के लिये सुविधा हो रही है, लेकिन अचानक उक्त बस सेवा बंद की गई। जिसका खामियाजा वर्तमान स्थिति में इस परिसर के नागरिकों को बससेवा के अभाव में पैदल और निजी वाहनों ने जानलेवा सफर करना पड़ रहा है।
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ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
सरकारी कामकाज, स्वास्थ्य सेवा और अन्य कार्यो के लिये सोमनूर परिसर के नागरिकों को सिरोंचा तहसील मुख्यालय में जाना पड़ता है, लेकिन पिछले 10 वर्षो से इस परिसर में राज्य परिवहन निगम की बस सेवा बंद पड़ी है। इस परिसर में यातायात की सुविधा नहीं होने के कारण परिसर का विकास रूक गया है। साथ ही जरूरी काम करने के लिये जाने वाले अथवा गंभीर मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचना मुश्किल हो गया है। नागरिकों होने वाली परेशानियों की ओर संबंधित विभाग और प्रशासन की अनदेखी होने के कारण ग्रामीणों ने आंदोलन करने की चेतावनी दी है।
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छात्रों का भविष्य अंधेरे में
सोमनुर सरपंच जेलराम कुरसम ने बताया कि केवल सड़कें कागजों पर दिखाकर नहीं चलेगा तो उस पर बस भी दौड़नी चाहिये। बससेवा के अभाव में छात्रों का भविष्य अंधेरे में होने के साथ ही मरीजों को अपनी जान दांव पर लगानी पड़ रही है। जिससे स्थानीय प्रशासन के प्रति परिसर के नागरिकों में तीव्र नाराजगी व्याप्त है।
