अंधेरे का एक साल, गड़चिरोली के इस गांव में बिजली बनी सपना, प्रशासन की नींद कब टूटेगी?
Gadchiroli Power Crisis: गड़चिरोली के एटापल्ली तहसील में महावितरण की बड़ी लापरवाही। ओडसा टोला गांव में एक साल से जला हुआ है ट्रांसफार्मर, अंधेरे में जीने को मजबूर ग्रामीण।
- Written By: गोरक्ष पोफली
बिना बिजली के गांव की प्रतीकात्मक फोटो (सोर्स: सोशल मीडिया)
Tribal Village Without Electricity: महाराष्ट्र सरकार जहाँ एक ओर गड़चिरोली जैसे आदिवासी बहुल और नक्सल प्रभावित जिले में ‘अंतिम व्यक्ति तक विकास’ पहुँचाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर बुनियादी सुविधाओं की जमीनी हकीकत इन दावों को पूरी तरह खोखला साबित कर रही है। एटापल्ली तहसील के ओडसा टोला गांव से एक ऐसा मामला सामने आया है, जो आधुनिक युग में प्रशासनिक लापरवाही की पराकाष्ठा है। यह गांव पिछले 365 दिनों (एक वर्ष) से बिजली की एक-एक बूंद के लिए तरस रहा है, लेकिन महावितरण (MSEDCL) के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही।
एक वर्ष से ठप है बिजली, प्रशासन मौन
एटापल्ली तहसील की मेंढरी ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाला ओडसा टोला गांव आज के दौर में भी मध्यकालीन युग जैसा जीवन जीने को मजबूर है। करीब एक वर्ष पूर्व गांव का इकलौता बिजली ट्रांसफार्मर तकनीकी खराबी के चलते जल गया था। नियमानुसार किसी भी गांव का ट्रांसफार्मर खराब होने के 48 से 72 घंटों के भीतर बदला जाना चाहिए, लेकिन ओडसा टोला के मामले में यह इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। गांव की गलियाँ और घर पिछले एक साल से सूरज ढलते ही अंधेरे के आगोश में समा जाते हैं।
विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर, शिकायतों का अंबार
इस अंधेरे का सबसे बुरा असर गांव के बच्चों और विद्यार्थियों की शिक्षा पर पड़ रहा है। डिजिटल शिक्षा और ऑनलाइन क्लास के दौर में यहाँ के छात्र लालटेन और दीयों की मद्धम रोशनी में पढ़ने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने कई बार एटापल्ली स्थित महावितरण के कार्यालय में चक्कर काटे और मौखिक व लिखित शिकायतें दर्ज कराईं। हर बार अधिकारियों की ओर से जल्द समाधान का आश्वासन दिया गया, लेकिन हकीकत में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अंधेरा होने के कारण न केवल जंगली जानवरों और सांपों का खतरा बढ़ गया है, बल्कि मोबाइल चार्जिंग जैसी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी ग्रामीणों को मीलों दूर जाना पड़ता है।
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महावितरण की घोर लापरवाही
यह मामला महावितरण की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करता है। दुर्गम और सीमावर्ती इलाकों में बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन ओडसा टोला के प्रति बरती जा रही यह उपेक्षा जिले के प्रशासनिक ढांचे में व्याप्त भ्रष्टाचार या संवेदनहीनता की ओर इशारा करती है। ग्रामीणों ने अब चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नया ट्रांसफार्मर नहीं लगाया गया, तो वे उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।
