Gadchiroli News: गड़चिरोली वर्तमान स्थिति में महुआ फूल चुनने का कार्य अंतिम चरण में है. लेकिन निरंतर बदल रहे वातावरण के चलते इस वर्ष यह सीजन संकट में दिखाई दे रहा है.
जिले के ग्रामीण और दुर्गम परिसर में इस वर्ष महुआ फूल अच्छा बहरा हुआ था. इससे आदिवासी समाज समेत ग्रामीण परिसर के नागरिकों को अच्छा उत्पादन मिल रहा था. लेकिन इस वर्ष वातावरणीय बदलाव के चलते महुआ फूल के उत्पादन में कमी आ गयी है. जिसका खामियाजा आदिवासियों का रोजगार संकट में पड़ गया है. आधा मार्च माह बीत जाने के बाद महुआ पेड़ को फूल लगते है.
महुआ फूल सीजन मार्च से अप्रैल तक चलता है. यह महुआ फूल ग्रामीण परिसर की अर्थव्यवस्था अधिक मजबूत करती है. जिले के दुर्गम और ग्रामीण परिसर में बड़े पैमाने पर महुआ के पेड़ देखने को मिलते है. इस महुआ फूल से केवल शराब नहीं बल्कि आदिवासी समाज के नागरिक अच्छे कार्य के लिए उपयोग करते है.
लेकिन इस वर्ष महुआ फूल के उत्पादन में काफी कटौती आ गयी है. शुरुआत से ही महुआ फूल में काफी कमी दिखाई देने से आदिवासियों का रोजगार व जीवनयापन पर परिणाम होने की संभावना जताई जा रही है. इस वर्ष बेमौसम बारिश के कारण अचानक पेड़ों में बदलाव होकर उन्हें तत्काल नये पत्ते उगने से फूल गिरना कम हो गए. कभी ठंड तो कभी गर्म वातावरण तैयार हो रहा है.
रात के समय कुछ समय तक पेड़ों से फूल गिरते है. वह अब काफी कम प्रमाण पर दिखाई दे रहे है. जिसके कारण आदिवासियों के रोजगार संकट निर्माण होने की बात कही जा रही है.
आदिवासी इलाकों में इन महुआ पेड़ों का काफी पहले से उपयोग हो रहा है. सुबह उठने के बाद आदिवासी बंधु महुआ फूल चुनने के लिए जाते है. इसके बाद कुछ दिनों तक सुखाने के बाद उन्हें बाजार में बेचने के लिए ले जाते है. अनेक नागरिक घरों में महुआ फूल से चटनी, लड्डू समेत अनेक व्यंजन तैयार करते है.
इन पदार्थों की बाजार में भी अच्छी मांग है. आदिवासियों के महुआ पेड़ उत्पादन का साधन बना है. फूल गिरना थमने के बाद महुआ पेड़ से गिरने वाले बीजों से तेल बनाया जाता है. विशेषत इस तेल का भोजन बनाने में उपयोग किया जाता है.
एक तरफ जिले के ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्र के लोगों को महुआ फूल रोजगार का साधन बने हुए है. लेकिन दुसरी ओर पिछले अनेक वर्षों से नागरिकों द्वारा निरंतर मांग करने के बाद भी वनविभाग द्वारा महुआ फूल खरीदी केंद्र शुरू नहीं किया गया है.जिसका नतीजा लोगों को कम दाम में निजी व्यापारियों को अपना महुआ फूल बेचना पड़ रहा है. जिससे जिले में खरीदी केंद्र की समस्या अब भी कायम है.