Gadchiroli News: मजदूरों के तेलंगाना की ओर बढ़ते कदम, खरीफ सीजन समाप्त होने से रोजगार की कमी

Gadchiroli Labour Migration: खरीफ सीजन समाप्त होने और स्थानीय रोजगार की कमी के कारण गड़चिरोली जिले के मजदूर मिर्च तुड़ाई के लिए तेलंगाना की ओर पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं।
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Gadchiroli Labour Migration (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Telangana Chilli Harvestin: गड़चिरोली जिले में आवश्यकता के अनुरूप उद्योग न होने के कारण खेती का सीजन समाप्त होते ही ग्रामीण क्षेत्रों के मजदूर हर वर्ष रोजगार की तलाश में पलायन करने को मजबूर हो जाते हैं। वर्तमान में खरीफ सत्र समाप्त हो चुका है, जिससे मजदूरों को स्थानीय स्तर पर काम नहीं मिल पा रहा है। परिणामस्वरूप उनके सामने जीवनयापन का गंभीर प्रश्न खड़ा हो गया है।

ऐसे में पड़ोसी राज्य तेलंगाना में मिर्च तुड़ाई का सीजन शुरू होने से गड़चिरोली जिले के ग्रामीण मजदूरों का रुख वहां की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। खेती के कार्य समाप्त होने के बाद किसान और खेत मजदूरों को रोजगार के अवसर नहीं मिल रहे हैं। इस कारण मजदूर वर्ग मिर्च तुड़ाई के लिए तेलंगाना की ओर स्थलांतरित हो रहा है।

मिर्च तुड़ाई की शुरुआत

मनरेगा सहित अन्य स्थानीय रोजगार योजनाओं का कार्य बंद होने से परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो गया है। इसी वजह से अधिकांश मजदूर हर वर्ष दो से तीन माह के लिए बाहर के राज्यों में पलायन करते हैं। इस वर्ष भी खेती कार्य समाप्त होने के बाद बड़ी संख्या में मजदूर पहले ही स्थलांतरित हो चुके हैं, जबकि कई मजदूर अभी जाने की तैयारी में हैं।

ठगी से सतर्क रहने की आवश्यकता

जिले के अधिकांश क्षेत्र दुर्गम हैं और ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिक बड़ी संख्या में मजदूरी के लिए अन्य राज्यों में जाते हैं। गत वर्ष कोरची तहसील के मजदूरों को पश्चिम महाराष्ट्र के एक ठेकेदार द्वारा ठगे जाने का मामला सामने आया था। ऐसे में बाहर राज्य मजदूरी के लिए जाने वाले मजदूरों को पूरी सतर्कता बरतने की आवश्यकता बताई जा रही है। प्रतिदिन 300 से 500 रुपये मजदूरी

मिर्च तुड़ाई के कार्य में प्रति किलो 10 रुपये की दर से मजदूरी मिलती है, जिससे एक व्यक्ति प्रतिदिन लगभग 300 से 400 रुपये कमा लेता है। आरमोरी तहसील के वैरागढ़ परिसर के अधिकांश मजदूर मिर्च तुड़ाई के लिए स्थलांतरित हो रहे हैं। मिर्च उत्पादक मालिक वाहनों से मजदूरों को चंद्रपुर जिले के बालापुर–तलोधी रेलवे स्टेशन तक पहुंचाते हैं, जहां से वे रेल मार्ग द्वारा तेलंगाना राज्य में जाते हैं।

वृद्ध और बच्चों के हाल बेहाल

  • मजदूर पलायन के दौरान पत्नी और बच्चों को अपने साथ ले जाते हैं।
  • कुछ मजदूर पत्नी को साथ ले जाने के कारण बच्चों को वृद्ध माता-पिता की जिम्मेदारी पर छोड़ देते हैं।
  • इससे बच्चों और वृद्ध नागरिकों को कई सामाजिक व आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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