गड़चिरोली: ग्रामीणों की एकजुटता से दुबागुडम बना नशामुक्त, 5 साल से शराबबंदी कायम; महिलाओं में बढ़ा सुरक्षा भाव

गड़चिरोली के भामरागड़ तहसील का दुबागुडम गांव पिछले 5 वर्षों से पूरी तरह शराबमुक्त है। मुक्तिपथ और ग्रामीणों की एकजुटता से यहां न केवल शराबबंदी हुई, बल्कि अपराधों में भी कमी आई है।
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Gadchiroli Liquor Free Village News: गड़चिरोली जिले की भामरागड़ तहसील के अतिदुर्गम क्षेत्र में बसा दुबागुडम गांव में पहले शराब बिक्री जोरों पर शुरू थी। ऐसे में ग्रामीण एकजुट होकर मुक्तिपथ के मार्गदर्शन में गांव में शुरू शराब बिक्री बंद की है। जिससे पिछले पांच वर्षों से इस गांव में शराब बिक्री बंद होकर गांव पूरी तरह शराब मुक्त हो गया है।

भामरागड़ तहसील के मन्नेराजाराम ग्रापं अंतर्गत दुबागुडम गांव का समावेश है। इस गांव में आदिवासी समुदाय और बौद्ध समाज के नागरिक एकजुटता से रहते है। गांव के लोगों का प्रमुख व्यवसाय खेती कर और मजदूरी कर लोग जीवनयापन करते है। पहले इस गांव में शराब बिक्री शुरू थी। जिसके कारण ग्रामीणों को विभिन्न परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।

गांव में नशेड़ियों की संख्या बढ़ने के कारण महिलाएं भी असुरक्षित थीं। जिसके कारण ग्रामीणों ने मुक्तिपथ से संपर्क कर गांव को शराबमुक्त करने का निर्णय लिया। जिसके बाद मुक्तिपथ के कार्यकर्ताओं ने गांव में बैठक लेकर ग्रामीणों को मार्गदर्शन कर शराबबंदी करना आवश्यक होने की बात कही।

इसके बाद सभा का आयोजन कर शराबबंदी का प्रस्ताव पारित किया गया। इसके अलावा शराब विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई करने के साथ ही नशा उपचार और जनजागृति उपक्रम चलाए जा रहे है। जिससे पिछले 5 वर्षों से गांव में शराब बिक्री बंद है। शराबबंदी के निर्णय पर अमल करने के लिए गांव संगठन अध्यक्ष अमोल तेलाची, गांव पाटिल चिन्ना मडावी, पेसा अध्यक्ष किशोर कुमो, श्रावण भगत, शशिकला कुमो, निर्मला भगत, आशा प्रीति भगत परिश्रम कर रहे है। 25 जीजीपी 5

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