

Gadchiroli Cremation Ground: 10 वर्ष पहले जिला परिषद के माध्यम से श्मशानभूमि के विकास की योजना स्वतंत्र रूप से चलाई गयी थी। बावजूद इसके जिले के सैकड़ों गांवों में श्मशानभूमि तक पहुंचने के लिये पक्की सड़क ही नहीं है। जहां पर सड़क बनाए गए थे। वह सड़कें अतिक्रमण के चलते गायब हो गई हैं। जिसके कारण बारिश के दिनों में अंतिम संस्कार करने के लिए जानेवाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जिले के अधिकत्तर गांवों में श्मशानभूमि के लिये जगह आरक्षित है। लेकिन वहां पर सरकार द्वारा अब तक सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गयी है। जिसका खामियाजा ग्रामीणों को असुविधा के बीच अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है।
श्मशानभूमि का विकास योजना अंतर्गत अनेक श्मशानभूमि में 10 वर्ष पहले टिन के शेड निर्माण किए गए थे। लेकिन उक्त कार्य घटिया दर्जे का किये जाने के कारण टिन के शेड कुछ ही दिनों में उड़कर केवल सीमेंट-कांक्रीट का चबूतरा शेष है। वहीं श्मशानभूमि के परिसर में हैन्डपंप लगाया गया था। लेकिन उसका उपयोग नहीं होने से इस पानी से स्नान करना संभव नहीं है। अंतिम संस्कार के लिये जाने वाले नागरिक अपने घरों जाकर स्नान कर रहे है।
प्रशासन के पास उपलब्ध जानकारी नुसार, जिले के अनेक गांवों में अब तक श्मशानभूमि ही नहीं बनाई गयी है। जिसके कारण वहां पर शेड, सड़क सरकार ने नहीं बनाई, जिसके कारण नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड रहा है। वहीं दूसरी ओर अनेक गांवों में गांव समीपस्थ जंगल और खेत में ही अंतिम संस्कार किया जा रहा है।
श्मशानभूमि की ओर जाने वाले मार्ग पर जमीन मालिकों ने अतिक्रमण किया है। बारिश के दिनों में अंतिम संस्कार के लिये श्मशानभूमि की ओर जाते समय रिश्तेदारों को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रीष्मकाल व शीतकाल में किसी भी तरह खेतों से होते हुए आवागमन किया जा सकता है। लेकिन बारिश के दिनों में सड़कों पर कीचड़ रहने के कारण आवामन करने की नौबत आन पड़ी है। विशेषतः कुछ गांवों में स्वतंत्र श्मशानभूमि के लिये जगह है। जिसके कारण ऐसे गांवों के लोग नाला अथवा नदी परिसर में अंतिम संस्कार करते है।