

Gadchiroli Airport: प्रस्तावित हवाई अड्डे के लिए उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण का विरोध करते हुए हिरापुर, गुरवला और राखी गांवों के किसान आक्रामक हो गए हैं। किसानों के आंदोलन के समर्थन में उनके बच्चों ने नए शैक्षणिक सत्र के पहले ही दिन स्कूल का बहिष्कार कर सरकार के निर्णय के खिलाफ अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। इसके कारण तीनों गांवों के स्कूलों में विद्यार्थियों की उपस्थिति बेहद कम रही, जिससे प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।
इस मामले में कांग्रेस नेता महेंद्र ब्राम्हणवाडे ने मंगलवार को पत्रपरिषद आयोजित कर हवाई अड्डे के लिए उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण का निर्णय तत्काल रद्द करने की मांग की। इस अवसर पर अनंता कुंभारे, दिवाकर निसार, अनिल कोठारे, तात्याजी चिचघरे और भिकाजी जेंगठे उपस्थित थे। महेंद्र ब्राम्हणवाडे ने कहा कि 4 जून को हुए आंदोलन के बाद सरकार ने 90 दिनों के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया स्थगित करने का आश्वासन दिया था। लेकिन इसके बाद अचानक भूमि मापन के लिए ऑनलाइन निविदा जारी किए जाने से किसानों में भारी नाराजगी फैल गई है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों का हवाई अड्डे से विरोध नहीं है, बल्कि वे केवल अपनी उपजाऊ कृषि भूमि को बचाना चाहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एक ओर सरकार किसानों को आश्वासन दे रही है, जबकि दूसरी ओर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है इस मुद्दे को राज्यपाल और विधानसभा में भी उठाया गया, लेकिन सरकार ने अब तक अपना रुख नहीं बदला है। मंगलवार को किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी से मुलाकात की। इस दौरान प्रशासन ने बताया कि संबंधित निविदा झाड़ीदार वन क्षेत्र के सर्वेक्षण के लिए जारी की गई है।
हालांकि किसानों ने सवाल उठाया कि यदि ऐसा है तो प्रस्तावित हवाई अड्डे से जुड़े गांवों के नाम निविदा में क्यों दर्ज किए गए हैं। ब्राम्हणवाडे ने कहा कि सरकार ने हवाई अड्डे के लिए 104 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जिससे किसानों को भविष्य में उनकी उपजाऊ जमीन अधिग्रहित होने की आशंका सता रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण का निर्णय वापस नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और अधिक तेज किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
मंगलवार से जिले के सभी स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र की उत्साहपूर्ण शुरुआत हुई। लेकिन हिरापुर, गुरवला और राखी गांवों के विद्यार्थियों ने स्कूल परिसर में पहुंचने के बावजूद कक्षाओं में प्रवेश नहीं किया और बहिष्कार आंदोलन में शामिल रहे। विद्यार्थियों ने कहा, जब तक उपजाऊ जमीन के अधिग्रहण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता, तब तक हम स्कूल नहीं जाएंगे। भविष्य में रोजगार की समस्या बढ़ेगी और खेती ही हमारी आजीविका का मुख्य साधन रहेगी। यदि हमारी जमीन ही नहीं बचेगी, तो पढ़लिखकर क्या करेंगे विद्यार्थियों के इस कदम से शिक्षा विभाग के सामने भी नई चुनौती खड़ी हो गई है। अब प्रशासन इस मुद्दे पर क्या निर्णय लेता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।