Gadchiroli Rural Development News: भामरागड़ वर्तमान स्थिति में देश समेत जिले में घरेलू गैस लिसेंडर की किल्लत महसूस हो रही है। उपभोक्ताओं द्वारा बुकिंग करने के बाद भी काफी दिनों तक गैस सिलेंडर घर तक पहुंचने की प्रतीक्षा करनी पड़ रही है।
ऐसे स्थिति में अनेक लोग अब चूल्हे पर भोजन पकाना शुरू कर दिए है। लेकिन दूसरी ओर जिले की आखिरी छोर पर बसी भामरागड़ तहसील के नेलगुंडा और लाहेरी क्षेत्र में कुछ परिवारों द्वारा बायोगैस पर्यावरणपूरक विकल्प चुना है। जिससे परिवार स्वयं पूर्ण बनते नजर आ रहे है। विशेषत संबंधित गांवों के दो परिवारों को बायोगैस का सफल प्रयोग कर स्वयं पूर्णता का आदर्श निर्माण किया है।
युवा रूरल एसोसिएशन नामक नागपुर की समाजसेवी संस्था, भारतीय रूरल लायवलिहुड फाउंडेशन BRLF के सहयोग से भामरागड़ तहसील में पाणलोट प्रकल्प अंतर्गत 15 ग्रापं में विभिन्न उपक्रम चलाए जा रहे है।
उक्त उपक्रम अंतर्गत नेलगुंडा निवासी मुन्शी वरसे और लाहेरी निवासी मादी कार्या पुंगाटी को बायोगैस संच लगाकर दिया गया है। मादी पुंगाटी को पंचायत समिति द्वारा अनुदान पर संच उपलब्ध कराया गया है। वहीं मुन्शी वरसे ने स्वयं के खर्च से बायोगैस संच लगाया है।
मुन्शी वरसे के परिवार में 12 सदस्य तो मादी पुंगाटी के परिवार के 7 सदस्यों का भोजन बायोगैस पर पकाया जा रहा है। गैस की बढ़ती कीमतों के मद्देनजर यह विकल्प बचत करने वाला होकर महंगे सिलेंडर पर निर्भर न रहते हुए स्वयं के घरों में गोबर गैस निमिर्ति कर यह परिवार अन्य परिवारों के आदर्श साबित हो रहे है।
बायोगैस प्रक्रिया से निर्माण होने वाला स्लरी खाद के रूप में उपयोग होकर पलसबाग और खेती को बड़ा लाभ हो रहा है। विशेषत युवा रूरल एसोसिएशन संसथा ने नागपुर व भंडारा जिले में करीब 17 हजार बायोगैस संच तैयार कर इतिहास बनाया है।
ग्रामीण परिसर में स्वच्छ ईंधन, पर्यावरण संरक्षण और वित्तीय बचत का संगम करने वाले बायोगैस प्रभावी साबित होकर इस तरह के उपक्रम की व्याप्ति बढ़ाने की आवश्यकता होने की बात कही जा रही है।