अहेरी नगर पंचायत में घमासान, नगराध्यक्ष ने मुख्याधिकारी पर लगाए भ्रष्टाचार के आरोप
Gadchiroli Corruption: गड़चिरोली के अहेरी नगर पंचायत में नगराध्यक्ष रोजा करपेत द्वारा मुख्याधिकारी गणेश शहाणे पर बिना मंजूरी कार्यादेश जारी करने और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
- Written By: आंचल लोखंडे
Aheri Nagar Panchayat (सोर्सः फाइल फोटो- सोशल मीडिया)
Aheri Nagar Panchayat Controversy: गड़चिरोली जिले की अहेरी नगर पंचायत का प्रशासन इन दिनों विवादों के घेरे में है। नगराध्यक्ष रोजा करपेत ने मुख्याधिकारी गणेश शहाणे पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्होंने लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की अनदेखी कर स्थायी समिति की अनुमति के बिना अपने पसंदीदा ठेकेदारों को कार्यादेश जारी किए इस संबंध में नगराध्यक्ष ने राज्यमंत्री तथा सह-पालकमंत्री आशीष जायसवाल को पत्र भेजकर मुख्याधिकारी गणेश शहाणे और कर निर्धारण अधिकारी वैभव पांढरे के तत्काल तबादले तथा उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उल्लेखनीय है कि शहाणे पर फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के मामले में भी कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
निविदा संबंधी आदेश जारी किए
नगराध्यक्ष के अनुसार, 17 मार्च 2026-को आयोजित स्थायी समिति की बैठक में केवल आगामी वर्ष के बजट पर चर्चा प्रस्तावित थी। लेकिन मुख्याधिकारी ने इसस बैठक का हवाला देते हुए बस्ती सुधार योजना के अंतर्गत निविदा संबंधी कार्यों के आदेश 9 अप्रैल को मनमाने ढंग से जारी कर दिए, जबकि इन कार्यों को स्थायी समिति की प्रशासनिक मंजूरी प्राप्त नहीं थी।
अधिकारों का उल्लंघन
इसके अलावा, कर निर्धारण अधिकारी वैभव पांढरे को तकनीकी पृष्ठभूमि न होने के बावजूद जलापूर्ति, विद्युत, कंप्यूटर और निर्माण जैसे महत्वपूर्ण अभियंत्रिकी विभागों का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। नगराध्यक्ष ने आरोप लगाया है कि दोनों अधिकारियों की मिलीभगत से नगर पंचायत में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहा है और सूचना के अधिकार के तहत जानकारी देने में भी टालमटोल की जा रही है।
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सार्वजनिक निर्माण विभाग को ‘ना-हरकत प्रमाणपत्र’ जारी करते समय नगराध्यक्ष के हस्ताक्षर अनिवार्य होते हैं, लेकिन आरोप है कि मुख्याधिकारी ने कई बार बिना हस्ताक्षर के ही प्रमाणपत्र जारी कर अधिकारों का उल्लंघन किया। इस मामले की शिकायत जिलाधिकारी और पालकमंत्री से की गई है, जिससे नगर पंचायत के प्रशासनिक तंत्र में हलचल मच गई है। अब देखना होगा कि इस मामले में जांच कर कार्रवाई होती है या राजनीतिक संरक्षण के चलते मामला दबा दिया जाता है।
लगाए गए आरोप निराधार
मुख्याधिकारी गणेश शहाणे ने कहा कि नगराध्यक्ष द्वारा प्रस्तुत विषय पत्रिका के अनुसार स्थायी समिति की मंजूरी लेकर ही कार्यादेश जारी किए गए हैं। यदि कोई शिकायत है तो उन्हें निरस्त करने का अधिकार मुख्याधिकारी के पास है। सूचना के अधिकार में असंतोष होने पर अपील का प्रावधान है। पूर्व की अनियमित पद्धति बंद कर शासन के निर्देशानुसार अब संवर्ग अधिकारियों को ही विभागों का प्रभार दिया गया है। साथ ही, शासकीय कार्यों के लिए 15 दिनों के भीतर ‘ना-हरकत प्रमाणपत्र’ देना अनिवार्य है, इसलिए सभी प्रमाणपत्र नियमानुसार वैध हैं। सभी आरोप निराधार है।
