गड़चिरोली में बाघ का आतंक, दोलंदा में हमले से 57 वर्षीय व्यक्ति की मौत, वन विभाग के खिलाफ 18 अगस्त को चक्काजाम

Gadchiroli Tiger Attack: गड़चिरोली के दोलंदा गांव में बाघ के हमले में 57 वर्षीय हरी वड्डे की मौत हो गई। घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश है और 18 अगस्त को चक्काजाम का ऐलान किया गया।
Hari Boharan Vadde
हरी बोहरण वड्डे(फोटो नवभारत)
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Protest Over Gadchiroli Tiger Attack: गड़चिरोली जिले के एटापल्ली तहसील के जारावंडी तथा आसपास के क्षेत्र में बाघ की दहशत अब गंभीर मानव-वन्यजीव संघर्ष में बदल गई है। रविवार, 16 अगस्त की सुबह एटापल्ली तहसील के दोलंदा गांव में बाघ के हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई, मृतक का नाम हरी बोहरण वड्डे (57) है।

इस घटना से पूरे क्षेत्र में भय तथा आक्रोश का माहौल है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, हरी वड्डे सुबह घर के पास जंगल की ओर शौच के लिए गए थे। काफी समय बीतने के बाद भी वे वापस नहीं लौटे तो परिजनों ने ग्रामीणों को इसकी जानकारी दी।

इसके बाद ग्रामीणों ने जंगल क्षेत्र में उनकी तलाश शुरू की। खोजबीन के दौरान घर से करीब 500 मीटर की दूरी पर उनका शव बरामद हुआ। घटनास्थल की स्थिति को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि बाघ ने उन पर हमला कर कुछ दूरी तक घसीटकर ले गया।

बाघ की मौजूदगी कैमरे में ट्रैप

घटना की सूचना मिलते ही वनविभाग के अधिकारी तथा और कर्मचारी मौके पर पहुंचे तथा घटनास्थल का पंचनामा किया। इससे पहले भी जारावंडी क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी ट्रैप कैमरे में दर्ज होने की जानकारी सामने आई थी। पिछले कुछ दिनों से जारावंडी और आसपास के गांवों में बाघ द्वारा पालतू मवेशियों पर हमले किए जा रहे थे।

बैल, गाय तथा बकरियों पर हमलों के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग से बाघ के बंदोबस्त और सुरक्षा के लिए तत्काल उपाय करने की मांग की थी। ग्रामीणों का आरोप है कि लगातार चेतावनी और शिकायतों के बावजूद वन विभाग की ओर से अपेक्षित ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अब सीधे इंसान की जान जाने के बाद ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ गई है।

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18 अगस्त को चक्काजाम आंदोलन

मानव जीवन पर बढ़ते खतरे तथा वन विभाग की कथित निष्क्रयता के विरोध में जारावंडी क्षेत्र के ग्रामीणों ने 18 अगस्त को चक्काजाम आंदोलन करने का निर्णय लिया है।

आंदोलन के दौरान वन विभाग के अधिकारियों का घेराव किए जाने की भी बात कही जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि बाघ के बंदोबस्त और नागरिकों की सुरक्षा के लिए तत्काल ठोस कार्रवाई चाहिए, घटना के बाद दोलंदा, जारावंडी सहित जंगल से सटे गांवों में नागरिकों को विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।

ग्रामीणों से अकेले जंगल अथवा जंगल से सटे खेतों में न जाने तथा विशेषकर सुबह और शाम के समय सावधानी बरतने की अपील की जा रही है। अब 18 अगस्त के आंदोलन से पहले प्रशासन और वन विभाग की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर पूरे क्षेत्र की नजरें टिकी हैं।

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