गड़चिरोली में 2,500 हेक्टेयर में होगी रबी सरसों की खेती, किसानों की आय बढ़ाने की पहल

Gadchiroli Mustard Cultivation: गड़चिरोली जिले में धान कटाई के बाद खाली रहने वाली 2,500 हेक्टेयर जमीन पर रबी सरसों की खेती को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया है।
gadchiroli rabi mustard cultivation target 2500 hectares
गड़चिरोली में सरसों की खेती(सोर्सः सोशल मीडिया)
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Highlights:

  • गड़चिरोली जिले में धान कटाई के बाद खाली रहने वाली 2,500 हेक्टेयर जमीन पर रबी सरसों की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

  • कृषि विभाग और कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन यंत्रणा (आत्मा) के संयुक्त प्रयासों से फसल विविधीकरण कार्यक्रम लागू किया जा रहा है।

  • जिलाधिकारी अविश्यांत पंडा ने किसानों से रबी सरसों की खेती अपनाकर अतिरिक्त आय का अवसर प्राप्त करने का आह्वान किया।

Gadchiroli Agriculture Department: खरीफ सीजन में धान की कटाई के बाद खाली रहनेवाली जमीन का रबी सीजन में उपयोग कर सरसों जैसी वैकल्पिक फसलों की खेती को बढ़ावा देने तथा फसल विविधीकरण के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में गड़चिरोली जिले में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। जिले में इस वर्ष धान कटाई के बाद खाली रहनेवाले 2,500 हेक्टेयर क्षेत्र में रबी सरसों की खेती करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

कृषि विभाग तथा कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन यंत्रणा (आत्मा) के संयुक्त प्रयासों से इस कार्यक्रम को प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। जिलाधिकारी अविश्यांत पंडा ने इस पहल के माध्यम से किसानों को अतिरिक्त आय प्राप्त करने के अवसर का लाभ उठाने का आह्वान किया। जिला वार्षिक योजना 2026-27 के अंतर्गत नवाचार कार्यक्रम के तहत फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी योजना के माध्यम से धान कटाई के बाद खाली रहनेवाली जमीन पर रबी सरसों की खेती को बढ़ावा देने का निर्णय लिया गया है।

विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन किया

इस कार्यक्रम की प्रभावी क्रियान्वयन और किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी पहुंचाने के उद्देश्य से 3 नवंबर को गड़चिरोली स्थित समाज कल्याण भवन में जिलाधिकारी अविश्यांत पंडा की अध्यक्षता में एक दिवसीय जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई।

कार्यशाला में सरसों की खेती का विस्तार, उन्नत उत्पादन तकनीक, कृषि निवेशों का नियोजन, फसल प्रबंधन, कीट एवं रोग नियंत्रण, कृषि उत्पादों का विपणन तथा मूल्य संवर्धन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन किया। इस दौरान जिले में सरसों की खेती के निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यक उपायों तथा कृषि विभाग और आत्मा के माध्यम से किसानों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर चर्चा की गई।

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फसल विविधीकरण

इस कार्यशाला में जिले के उपविभागीय कृषि अधिकारी, तहसील कृषि अधिकारी, मंडल कृषि अधिकारी, उप कृषि अधिकारी, सहायक कृषि अधिकारी, तहसील प्रौद्योगिकी प्रबंधक, सहायक प्रौद्योगिकी प्रबंधक तथा समूह सहायक उपस्थित थे। इसके साथ ही किसान उत्पादक कंपनियों के संचालक, कृषि सखी, प्रगतिशील किसान तथा महिला किसानों ने भी कार्यशाला में सहभागिता की। किसानों को रबी सीजन में सरसों की खेती अपनाने तथा फसल विविधीकरण के माध्यम से खेती को अधिक लाभदायक बनाने के संबंध में जानकारी दी गई।

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खाली जमीन का होगा उपयोग

जिले में खरीफ सीजन के दौरान अधिकांश किसान धान की खेती करते हैं। धान की कटाई पूरी होने के बाद जिले के बड़े क्षेत्र में जमीन खाली रह जाती है। इस जमीन का रबी सीजन में पर्याप्त उपयोग नहीं हो पाता। ऐसे में सरसों जैसी कम अवधि वाली वैकल्पिक फसल की खेती किसानों के लिए लाभदायक साबित हो सकती है।

आत्मा की प्रक्रिया संचालक तथा जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी प्रीति हिरलकर ने प्रस्तावना में कार्यशाला के उद्देश्य और फसल विविधीकरण कार्यक्रम की भूमिका स्पष्ट की। उन्होंने किसानों को रबी सीजन में वैकल्पिक फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करने तथा कृषि विभाग की योजनाओं को प्रभावी ढंग से किसानों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर रोशनी डाली, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. किशोर झाड़े ने किसानों को योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी।