

Gadchiroli Pregnant Woman Death: प्रसूति के लिए भर्ती कराई गई 27 वर्षीय महिला और उसके नवजात बच्चे की उपचार के दौरान मौत होने का मामला सामने आया है। परिजनों ने उपचार में कथित लापरवाही और करीब पांच घंटे की देरी का गंभीर आरोप लगाया है। इस मामले में संबंधित डाक्टर और नर्सिंग कर्मचारियों की जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग पूर्व पंस सदस्य अमिता मडावी और मृतक महिला के परिजनों की है। मृतक महिला का नाम चामोर्शी तहसील के जामगिरी निवासी जिजा हंसराज सातर (27) है।
आयोजित संवाददाता सम्मेलन में मृतक महिला का पति हंसराज सातर, सोनी कंगाले, जीजाबाई लोनबले, शरद कस्तुरे, संपत सातर समेत परिजन उपस्थित थे। परिजनों के अनुसार, जिजा सातर को प्रसूति के लिए रविवार तड़के करीब पांच बजे चामोर्शी ग्रामीण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सुबह करीब 10.30 बजे तक संबंधित डाक्टर अस्पताल में उपलब्ध नहीं थे। इस दौरान नर्सिंग कर्मचारियों ने महिला की हालत ठीक होने की बात कही। बाद में स्थिति गंभीर बताते हुए उसे गडचिरोली रेफर करने की सलाह दी गई।
इसके बाद सुबह करीब 11.45 बजे महिला को गडचिरोली स्थित महिला एवं बाल अस्पताल में भर्ती कराया गया। जांच के बाद परिजनों को बताया गया कि, गर्भ में ही बच्चे की मौत हो चुकी है। हालांकि, उस समय महिला की हालत स्थिर होने की जानकारी दी गई थी, ऐसा परिजनों का दावा है। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि, अस्पताल की एक महिला कर्मचारी ने उन्हें कथित तौर पर बेहद असंवेदनशील तरीके से बच्चे की मौत की जानकारी दी। उनके अनुसार, कर्मचारी ने कहा कि, आपका बच्चा चला गया, आप ठीक रहें। इस कथित व्यवहार से परिजन आहत हुए।
नवजात बच्चे और महिला की मौत के मामले में डा। किलनाके के खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई करने तथा डा। देवरे की भूमिका की गहन जांच करने की मांग की गई है। परिजनों ने संबंधित चिकित्सकों और कर्मचारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। अमिता मडावी ने कहा कि, पहली बार मां बनने वाली महिला और उसके नवजात बच्चे की इस तरह मौत होना बेहद दुखद है। मृतक के परिवार को न्याय दिलाने के साथ ही आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की भी मांग की। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, उपचार में वास्तव में चिकित्सकीय लापरवाही हुई थी या नहीं, उपचार में देरी के कारण क्या थे और महिला को समय पर आवश्यक चिकित्सा सुविधा क्यों नहीं मिल सकी, इन सभी बिंदुओं की निष्पक्ष जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
परिजनों के अनुसार, शाम के समय जिजा को अचानक भारी रक्तस्राव शुरू हो गया। रक्तस्राव शुरू होने के बाद भी कई घंटे तक अपेक्षित उपचार नहीं मिला। आखिरकार शाम करीब सात बजे महिला को आगे के उपचार के लिए जिला अस्पताल में रेफर किया गया। रात करीब 9।50 बजे उसकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि, महिला की हालत बिगड़ने और उपचार में हुई देरी की जानकारी उन्हें समय पर नहीं दी गई। चिकित्सकों की ओर से रक्तस्राव और रक्तचाप बढ़ने के कारण हालत गंभीर होने की बात बताई गई। यदि समय पर उचित उपचार और आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाती, तो शायद स्थिति अलग हो सकती थी।
गडचिरोली जिला शल्य चिकित्सक डॉ. वर्षा लहाडे ने कहा कि नवजात शिशु और उसकी मा की मृत्यु की घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इस मामले में लापरवाही हुई है या नहीं, यह जांच के बाद स्पष्ट होगा। यदि जांच में किसी की लापरवाही सामने आती है, तो संबंधितों के खिलाफ उचित प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।