

Highlights:
गड़चिरोली पुलिस और पत्र सूचना कार्यालय नागपुर ने पत्रकारों के लिए 'माओवादमुक्त भारत' विषय पर संयुक्त कार्यशाला आयोजित की।
कार्यशाला में माओवाद की उत्पत्ति, विस्तार, विचारधारा और वर्तमान स्थिति पर विशेषज्ञों ने विचार रखे।
माओवादी प्रभाव समाप्त होने के बाद विकास कार्यों के सामने आने वाली संभावित चुनौतियों पर चर्चा हुई।
Gadchiroli Police Workshop: गड़चिरोली पुलिस दल और केंद्र सरकार के पत्र सूचना कार्यालय, नागपुर के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को पत्रकारों के लिए 'माओवादमुक्त भारत' विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। इस दौरान माओवाद की उत्पत्ति और विस्तार से लेकर उसके प्रभाव को समाप्त करने के लिए किए गए विभिन्न प्रयासों की जानकारी दी गई।
साथ ही माओवादमुक्त भारत के निर्माण की दिशा में आनेवाली भविष्य की चुनौतियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने कहा कि, आपसी समन्वय और सकारात्मक संवाद के माध्यम से इन चुनौतियों का सामना किया जा सकता है। पुलिस मुख्यालय के एकलव्य सभागृह में आयोजित इस कार्यक्रम में विशेष पुलिस महानिरीक्षक (नक्सल विरोधी अभियान) संदीप पाटिल नागपुर से ऑनलाइन माध्यम से शामिल हुए।
इसके अलावा पुलिस कार्यशाला में प्रमुख वक्ताओं ने माओवाद की उत्पत्ति, विस्तार, वर्तमान स्थिति, माओवादियों की कार्यप्रणाली, विचारधारा तथा माओवाद विरोधी अभियानों के दौरान आने वाली चुनौतियों पर अपने अनुभव और अध्ययनपूर्ण विचार प्रस्तुत किए। कार्तिक लोखंडे ने सवाल उठाया कि, माओवादी समाप्त हो गए, लेकिन क्या माओवाद भी पूरी तरह समाप्त हो गया है?
उन्होंने शेष बचे माओवादी प्रभाव के माध्यम से भविष्य में विकास कार्यों में उत्पन्न की जा सकने वाली बाधाओं की आशंका पर भी विचार रखे। विशेष पुलिस महानिरीक्षक संदीप पाटील ने सशस्त्र माओवाद के पतन के बाद भविष्य में पुलिस विभाग के सामने आनेवाली चुनौतियों पर विस्तार से मार्गदर्शन किया।
पुलिस उपमहानिरीक्षक योगेश कुमार और पुलिस अधीक्षक एम. रमेश ने गड़चिरोली जिले में माओवाद विरोधी संघर्ष के सफर, पुलिस विभाग द्वारा अपनाई गई विभिन्न रणनीतियों, सुरक्षा एजेंसियों के योगदान, स्थानीय नागरिकों की भागीदारी तथा विकासात्मक योजनाओं के माध्यम से माओवाद का प्रभाव कम करने के लिए किए गए प्रयासों की जानकारी दी।
उपमहानिरीक्षक योगेश कुमार, पुलिस अधीक्षक एम. रमेश, माओवाद विषय के विशेषज्ञ, वरिष्ठ लेखक एवं पॉलिसी एनालिस्ट पी.वी. रमना, वरिष्ठ पत्रकार कार्तिक लोखंडे, अपर पुलिस अधीक्षक (अभियान) कार्तिक मधीरा, अपर पुलिस अधीक्षक (प्रशासन) गोकुल राज जी., पत्र सूचना कार्यालय नागपुर के सौरभ खेकड़े और देवप्रकाश दुबे प्रमुख रूप से उपस्थित थे।
इस कार्यशाला के माध्यम से पत्रकारों को माओवाद की समस्या की वस्तुनिष्ठ जानकारी के साथ ही नक्सलमुक्त भारत की दिशा में जारी प्रयासों की पृष्ठभूमि, वर्तमान स्थिति और भविष्य की कार्ययोजना को समझने का अवसर मिला। कार्यक्रम के अंत में माओवाद विरोधी अभियान के दौरान देश के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले 214 शहीद जवानों की स्मृति को नमन करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि, गड़चिरोली जिले में माओवाद का प्रभाव समाप्त होने के बाद भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए पुलिस विभाग, सरकार, मीडिया और समाज के विभिन्न घटकों के बीच समन्वय तथा सकारात्मक संवाद आवश्यक है। वरिष्ठ अधिकारियों, विशेषज्ञों और पत्रकारों ने माओवाद विरोधी अभियान के अनुभवों, सफल कार्यप्रणालियों और भविष्य की चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया, पत्रकारों ने विभिन्न सवालों के माध्यम से चर्चा में सक्रिय भागीदारी निभाई।