

Highlights:
गड़चिरोली जिले की भामरागढ़ तहसील के 23 गांवों में जनवरी से मई 2026 के बीच कुल 176 खेत तालाब बनाए गए।
इन खेत तालाबों से लगभग 338 हेक्टेयर कृषि भूमि को जल स्रोत उपलब्ध हुआ है, जिससे सूखे जैसी स्थिति में भी किसानों को राहत मिल रही है।
किसानों ने अतिरिक्त आय के लिए खेत तालाबों में मछली बीज छोड़े हैं।
Gadchiroli Farm Pond Project: गड़चिरोली जिले के भामरागढ़ तहसील के आदिवासी किसानों को खेती के लिए स्थायी जल सुविधा उपलब्ध कराने तथा उनकी आर्थिक आय बढ़ाने के उद्देश्य से हाई इम्पैक्ट मेगा वाटरशेड परियोजना एवं भारतीय रूरल लाइवलीहुड फाउंडेशन (BRLF) के सहयोग से कुल 176 खेत तालाबों का निर्माण किया गया है।
युवा रूरल एसोसिएशन (YRA) और कृषि विभाग के समन्वय से संचालित इस पहल के माध्यम से तहसील के 23 गांवों के किसानों को जल सुरक्षा, संरक्षित सिंचाई और मत्स्य पालन से अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर प्राप्त हुआ है। भामरागढ़ तहसील आदिवासी बहुल एवं वन क्षेत्र से सटा हुआ इलाका है।
यहां के अधिकांश किसान धान की खेती पर निर्भर हैं। खेती मुख्य रूप से वर्षा आधारित होने के कारण बारिश में लंबे अंतराल से फसलों को नुकसान पहुंचता था, जिसका सीधा असर किसानों की वार्षिक आय पर
पड़ता था। सिंचाई की स्वतंत्र व्यवस्था नहीं होने के कारण खरीफ मौसम के अलावा अन्य फसलों की खेती करना भी किसानों के लिए कठिन था। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए किसानों के खेतों में जल संग्रहण की व्यवस्था विकसित करने के लिए खेत तालाब निर्माण का उपक्रम शुरू किया गया।
इस वर्ष जिले में सूखे जैसी कठिन परिस्थितियां उत्पन्न होने के बावजूद भामरागढ़ तहसील के किसानों के लिए ये खेत तालाब काफी मददगार साबित हो रहे हैं। जनवरी से मई 2026 के दौरान कुल 176 खेत तालाबों का निर्माण कार्य पूरा किया गया। इन खेत तालाबों के माध्यम से लगभग 338 हेक्टेयर कृषि भूमि को जलस्रोत की सुविधा उपलब्ध हुई है। खेत तालाबों का उपयोग केवल सिंचाई तक सीमित न रखते हुए किसानों ने स्वयं पहल कर अतिरिक्त आय के उद्देश्य से उनमें मछली बीज छोड़े।
किसानों द्वारा प्रत्येक खेत तालाब में लगभग 3 से 4 किलोग्राम मत्स्य बीज डाला गया। इसके साथ ही मछलियों की प्रजातियों का चयन, मत्स्य बीज डालने की उचित मात्रा और तालाबों के प्रबंधन को लेकर तकनीकी मार्गदर्शन भी प्रदान किया गया। इससे मत्स्य पालन में संभावित गलतियों और नुकसान को कम कर इस गतिविधि को अधिक लाभकारी बनाने में सहायता मिल रही है। आदिवासी उपयोजना के अंतर्गत विभिन्न योजनाओं का भी क्रियान्वयन किया गया है।
परियोजना के अनुमान के अनुसार, खेत तालाब निर्माण से पहले किसानों को मुख्य फसल से प्रतिवर्ष लगभग 25 से 30 हजार रुपए की आय प्राप्त होती थी। अब खेत तालाबों के माध्यम से मुख्य फसल के साथ मत्स्य पालन और पूरक फसलों की खेती का अवसर उपलब्ध होने से किसानों की कुल वार्षिक आय 85 से 95 हजार रुपए तक पहुंचने की संभावना व्यक्त की गई है। हालांकि, यह आंकड़ा अनुमानित है तथा वास्तविक आय उत्पादन, बाजार भाव और अन्य परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। खेत तालाबों के माध्यम से जल संरक्षण, खेती के लिए संरक्षित सिंचाई, मत्स्य पालन और पूरक फसलों की खेती को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया गया है।
युवा रूरल असोसिएशन भामरागड टीम लीडर अजय गावडे ने कहा कि इन खेत तालाबों से सभी किसानों को उपजिविका कर उत्पादन बढ़ने में मदद हुई और सुखे के कठिन समय में भी खेतों के लिये सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो गयी है। इसके लिए कृषि विभाग और अन्य सरकारी यंत्रणाओं का मार्गदर्शन मिला है।
भामरागढ़ तहसील कृषि अधिकारी कुणाल राऊत ने कहा कि भामरागढ़ जैसे दुर्गम तहसील के किसान भाइयों को स्थायी सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराना, संरक्षित सिंचाई के माध्यम से फसल क्षेत्र में वृद्धि करना तथा आय के अन्य आर्थिक स्रोत विकसित कर किसानों की आजीविका को मजबूत बनाना कृषि विभाग का प्रमुख उद्देश्य है। इसी दृष्टिकोण से युवा रूरल एसोसिएशन (YRA) के समन्वय से तहसील कृषि कार्यालय द्वारा आवश्यक कार्यवाही की जा रही है।