छात्रों की सुरक्षा का मुद्दा गंभीर, आश्रमशालाओं में हुए घटनाओं की राज्यस्तरीय जांच की उठी मांग

Ashramshala Safety Maharashtra: गडचिरोली समेत महाराष्ट्र की आश्रमशालाओं और छात्रावासों में हुई गंभीर घटनाओं को लेकर अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद ने राज्यस्तरीय जांच की मांग की है।
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आश्रमशालाओं की राज्यस्तरीय जांच की मांग(सोर्सः सोशल मीडिया)
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Gadchiroli Ashramshala Snake Bite Case: महाराष्ट्र के आदिवासी विकास विभाग के अधीन संचालित सरकारी, अनुदानित और निजी आश्रमशालाओं तथा छात्रावासों में 9 अगस्त 2025 से 9 अगस्त 2026 के बीच हुई विभिन्न गंभीर घटनाओं की राज्यस्तरीय जांच कर विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए ठोस उपाय करें, ऐसी मांग अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद ने की है। इस संबंध में जिलाधिश के माध्यम से राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को ज्ञापन भिजवाया गया है।

ज्ञापन में परिषद ने कहा कि, पिछले एक वर्ष में राज्य की विभिन्न आश्रमशालाओं और छात्रावासों में विद्यार्थियों की मृत्यु, आत्महत्या, सर्पदंश, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, विद्यार्थियों के साथ उत्पीड़न तथा सुरक्षा व्यवस्था में खामियों जैसी गंभीर घटनाएं सामने आई हैं। विशेष रूप से गड़चिरोली जिले के धानोरा तहसील में आश्रमशाला के छात्रावास में सर्पदंश से तीन छात्राओं की मौत की घटना बेहद चिंताजनक है। इस घटना ने आदिवासी विद्यार्थियों की सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर सामने ला दिया है।

राज्यस्तरीय जांच और सुरक्षा ऑडिट की मांग

नंदुरबार जिले के नवापुर में आश्रमशाला के छह वर्षीय विद्यार्थी की मौत, पालघर जिले के वाडा और विक्रमगढ़ क्षेत्र की आश्रमशालाओं में विद्यार्थियों की आत्महत्या की घटनाओं, मोखाडा में छात्रावास के विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़े मामले तथा नाशिक जिले के सटाणा में छात्राओं द्वारा मानसिक प्रताड़ना को लेकर की गई शिकायतों का भी उल्लेख किया गया है।

CCTV, स्वास्थ्य सुविधा और 24 घंटे सुरक्षा की मांग

परिषद ने महाराष्ट्र की सभी सरकारी, अनुदानित और निजी आश्रमशालाओं तथा छात्रावासों का राज्यव्यापी सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग की है। ज्ञापन सौंपते समय महिला जिलाध्यक्ष पुष्पलता कुमरे, जिला महिला सचिव विद्या दुग्गा, तहसील अध्यक्ष लीना कोकोडे, शहर अध्यक्ष आरती कोल्हे, रोहिणी मसराम, माधुरी पडोती, शारदा मडावी, वनिता ताराम, शामला घोड़ाम और शशिकला जांगी समेत अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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छात्रावास में सुविधाएं उपलब्ध कराए

प्रत्येक आवासीय विद्यालय में 24 घंटे सुरक्षा व्यवस्था, रात में निगरानी, सीसीटीवी कैमरे, प्राथमिक उपचार केंद्र, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी और आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की गई है। सर्पदंश की आशंका वाले क्षेत्रों में स्थित आश्रमशालाओं में विशेष सर्परोधी उपाय और तत्काल उपचार की व्यवस्था करने पर भी जोर दिया गया है। इसके अलावा विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए नियमित परामर्श, शिकायतों के लिए स्वतंत्र एवं गोपनीय शिकायत निवारण व्यवस्था तथा आश्रमशालाओं को मिलने वाले सरकारी निधि का सामाजिक ऑडिट कराने की मांग की गई है।

स्थायी सुरक्षा व्यवस्था बनाए

परिषद ने कहा कि, आदिवासी अभिभावक अपने बच्चों को शिक्षा के लिए आश्रमशालाओं में भेजते हैं। उनके बच्चों के जीवन और सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की है। केवल घटना के बाद जांच समितियां गठित करने के बजाय ऐसी स्थायी सुरक्षा व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जिससे घटनाओं को रोका जा सके। आदिवासी विद्यार्थियों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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