

Chandrapur Ashramshala Issues Tribal Education: स्कूल ठीक करो अभियान के प्रमुख अभिजीत दिपके ने गड़चिरोली की आश्रमशालाओं के निरीक्षण के दौरान छात्राओं के स्नानगृहों में छत और दरवाजे नहीं होने तथा शौचालयों में सुविधाओं की कमी का दावा किया। उन्होंने प्रशासन से सुधार और कार्रवाई की मांग उठाई।
आदिवासी विद्यार्थियों की शिक्षा के लिए सरकारी योजनाओं और करोड़ों रुपये के बजट के दावों के बीच आश्रमशालाओं की मूलभूत सुविधाओं पर सवाल उठे हैं। स्कूल ठीक करो अभियान के प्रमुख अभिजीत दिपके ने गड़चिरोली की कुछ आश्रमशालाओं के निरीक्षण के बाद छात्राओं के स्नानगृहों में छत और दरवाजे नहीं होने का दावा किया है।
उन्होंने शौचालयों और प्रसाधनगृहों में दरवाजों की कमी तथा अस्वच्छता का भी जिक्र किया। दिपके के अनुसार, यह स्थिति विद्यार्थियों की शिक्षा के साथ उनकी सुरक्षा और गरिमा से भी जुड़ा मुद्दा है।
गड़चिरोली जिले की आश्रमशालाओं के निरीक्षण के दौरान सामने आई स्थिति को लेकर अभिजीत दिपके ने चिंता जताई। उनके अनुसार, कुछ आश्रमशालाओं में छात्राओं के स्नानगृहों की छत और दरवाजे नहीं हैं। वहीं शौचालयों और प्रसाधनगृहों में भी आवश्यक सुविधाओं की कमी तथा अस्वच्छता देखने को मिली।
दिपके ने कहा कि आदिवासी विद्यार्थियों के लिए शिक्षा योजनाओं और निधि की बात की जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर मूलभूत सुविधाओं की स्थिति की जांच जरूरी है।
गड़चिरोली का दौरा पूरा करने के बाद शुक्रवार रात चंद्रपुर पहुंचे दिपके का सीजेपी स्वयंसेवकों ने स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने स्वयंसेवकों द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की।
अभिजीत दिपके ने बताया कि चंद्रपुर जिले में अब तक 55 स्कूलों का निरीक्षण किया गया है। उनके अनुसार, स्कूलों में मिली कमियों को प्रशासन के संज्ञान में लाने और लगातार फॉलोअप करने के बाद कई जगह सुधार कार्य भी हुए हैं।
दौरे के दौरान कुछ स्थानों पर मुख्याध्यापकों और शिक्षकों के कथित रूप से मद्यपान कर स्कूल पहुंचने का दावा भी दिपके ने किया। उन्होंने कहा कि नशे की हालत में पाए जाने वाले मुख्याध्यापकों के खिलाफ निलंबन जैसी कार्रवाई होनी चाहिए।
हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित शिक्षकों या प्रशासन का पक्ष खबर में उपलब्ध नहीं है।
चंद्रपुर शहर के शासकीय अभियांत्रिकी महाविद्यालय में विद्यार्थियों से संवाद करते हुए दिपके ने कहा कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के विद्यार्थियों में प्रतिभा की कमी नहीं है। उनके अनुसार, विद्यार्थियों को केवल स्कूल की इमारत नहीं, बल्कि सुरक्षित वातावरण, मूलभूत सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सहयोग भी मिलना जरूरी है।
उन्होंने भामरागड़ स्थित स्व. बाबा आमटे और डॉ. प्रकाश आमटे के प्रकल्प की आश्रमशालाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सीमित संसाधनों में खड़ा किया गया यह मॉडल प्रशासन के सामने एक उदाहरण है। दिपके के अनुसार, भामरागड़ के इन प्रकल्पों को छोड़कर अन्य आश्रमशालाओं की सुविधाएं संतोषजनक नहीं मिलीं, जिसकी जांच जरूरी है।