

Gen Alpha Protest Dharashiv Students: अभी तक देश ने जंतर-मंतर पर Gen Z के तेवर देखे थे, लेकिन अब महाराष्ट्र के धाराशिव से Gen Alpha के आंदोलन की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने सरकार और प्रशासन की नींद उड़ा दी है। धाराशिव जिले के परंडा तहसील स्थित सोनारी जिला परिषद माध्यमिक स्कूल के छात्र-छात्राओं ने अपनी शिक्षा के अधिकार के लिए जो रास्ता अपनाया, उसकी चर्चा अब पूरे राज्य में हो रही है।
इस स्कूल में पढ़ने वाले 9वीं और 10वीं कक्षा के छात्र पिछले चार वर्षों से गणित और विज्ञान जैसे मुख्य विषयों के शिक्षकों से वंचित थे। छात्रों और अभिभावकों ने कई बार प्रशासन से गुहार लगाई, पत्र लिखे, लेकिन जब सिस्टम के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी, तो इन नन्हे प्रदर्शनकारियों ने कड़ा रुख अपनाने का फैसला किया। छात्रों ने न केवल अपने स्कूल को ताला ठोक दिया, बल्कि सीधे जिला परिषद के CEO के कार्यालय पहुंच गए और वहां अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया।
आंदोलनकारी छात्रों, विशेषकर 10वीं कक्षा के विद्यार्थियों का कहना है कि उनकी बोर्ड परीक्षाएं सिर पर हैं। मुख्य विषयों के शिक्षक न होने के कारण उनका भविष्य दांव पर लगा है। इस आंदोलन को स्थानीय ग्रामीणों, अभिभावकों और छात्र संगठन का भी पुरजोर समर्थन मिला। बच्चों के इस अडिग रवैये और बढ़ते दबाव को देखते हुए जिला प्रशासन को तुरंत हरकत में आना पड़ा। प्रशासन ने आनन-फानन में एक शिक्षक की नियुक्ति कर दी है, हालांकि यह अभी एक अस्थायी व्यवस्था है।
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए एनसीपी नेता रोहित पवार ने सरकार को जमकर आड़े हाथों लिया। उन्होंने इसे Gen-Alpha का धमाका करार देते हुए कहा कि एक तरफ हजारों पात्र उम्मीदवार शिक्षक भर्ती के लिए उपलब्ध हैं, फिर भी चार-चार साल तक विज्ञान और गणित जैसे विषयों के लिए शिक्षक न होना सरकार के लिए बेहद शर्मनाक है।
पवार ने स्थानीय विधायक तानाजी सावंत पर भी निशाना साधा, जो खुद एक बड़े शिक्षण सम्राट माने जाते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि महाविकास अघाड़ी सरकार को गिराने के लिए सावंत ने 150 बैठकें की थीं, लेकिन अपने ही निर्वाचन क्षेत्र के गरीब छात्रों को शिक्षक दिलाने के लिए उन्होंने एक भी बैठक क्यों नहीं की?
रोहित पवार ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें जंतर-मंतर के आंदोलन से सबक लेना चाहिए और छात्रों की मांगों की अनदेखी करना बंद कर देना चाहिए। धाराशिव की इस घटना ने साफ कर दिया है कि अब केवल युवा ही नहीं, बल्कि Gen Alpha भी अपने हक के लिए सड़क पर उतरने से नहीं हिचकिचाएंगे। प्रशासन ने फिलहाल एक शिक्षक की नियुक्ति तो कर दी है, लेकिन रिक्त पदों को भरने की स्थायी मांग अभी भी बरकरार है।