पुणे विश्वविद्यालय फर्जी डिग्री घोटाला: रोहित पवार ने निष्पक्ष जांच की मांग, भाजपा से जुड़े तार होने का दावा

Pune University News: पुणे विश्वविद्यालय फर्जी डिग्री मामले में विधायक रोहित पवार ने कुलगुरु से मुलाकात कर 2015 से अब तक जारी सभी डिग्रियों के व्यापक ऑडिट की मांग की।
MLA Rohit Pawar meets SPPU VC over fake degree scam; demands a comprehensive audit of all degrees and marksheets issued by university since 2015.
पुणे विश्वविद्यालय, रोहित पवार (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Pune University Fake Degree Scam Rohit Pawar Audit Demand: सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय (एसपीपीयू) में सामने आए कथित फर्जी डिग्री और अंकतालिका घोटाले को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने गुरुवार को विश्वविद्यालय के कुलगुरु से मुलाकात कर पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि मामले की जांच केवल एक कर्मचारी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।

बड़े रैकेट की आशंका जताई

रोहित पवार ने दावा किया कि इस कथित फर्जीवाड़े के तार भाजपा के कुछ पदाधिकारियों और विश्वविद्यालय से जुड़ी निजी कंपनियों तक जुड़े हो सकते हैं। हालांकि, उन्होंने अपने दावों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से कोई साक्ष्य पेश नहीं किया।

उनका कहना है कि केवल एक कर्मचारी को निलंबित कर और उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर देने से पूरे मामले का खुलासा नहीं होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2016 से संबंधित विभाग में कार्यरत कर्मचारी अकेले इतने बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा नहीं कर सकता।

2015 से जारी डिग्रियों के ऑडिट की मांग

विधायक ने मांग की कि वर्ष 2015 से अब तक विश्वविद्यालय द्वारा जारी सभी डिग्रियों, अंकतालिकाओं और सीट नंबरों का व्यापक ऑडिट कराया जाए। उनका कहना है कि इससे यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो उसका पूरा सच सामने आ सकेगा और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई संभव होगी।

आरोपी कर्मचारी निलंबित, पुलिस में मामला दर्ज

इस बीच, सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय प्रशासन ने फर्जी डिग्री और अंकतालिका उपलब्ध कराने के आरोप में अपने एक कर्मचारी को निलंबित कर दिया है। विश्वविद्यालय ने इस मामले में चतुश्रृंगी पुलिस थाने में शिकायत भी दर्ज कराई है। विश्वविद्यालय के बयान के अनुसार, लेखा विभाग में कार्यरत रमेश मुखेकर पर आरोप है कि उसने एक छात्र से 70 हजार रुपये लेकर बी.कॉम. की डिग्री और अंकतालिका उपलब्ध कराने का वादा किया था।

जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच जारी है और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह मामला अब शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वविद्यालयों की विश्वसनीयता से जुड़ा अहम मुद्दा बन गया है। फिलहाल, रोहित पवार द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और उनकी जांच संबंधित एजेंसियों के स्तर पर होना बाकी है।

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