

Maharashtra Meghana Bordikar: महाराष्ट्र में गणेशोत्सव के दौरान तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम और डीजे (DJ) के इस्तेमाल को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। धाराशिव पहुँचीं राज्य मंत्री मेघना बोर्डीकर ने डीजे पर कड़े नियमों और पूर्ण रोक की मांग का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि धार्मिक और सार्वजनिक उत्सव मनाते समय मर्यादा और न्यायिक आदेशों का पालन होना बेहद आवश्यक है।
निजी दर्द और डीजे बैन का समर्थन
धाराशिव में मीडिया से बात करते हुए मंत्री मेघना बोर्डीकर ने अपनी मांग के पीछे की एक दर्दनाक घटना साझा की। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष गणेशोत्सव के दौरान डीजे के अत्यधिक शोर और कानफोड़ू आवाज के कारण उनके चचेरे भाई की जान चली गई थी। इस व्यक्तिगत दुखद अनुभव के बाद ही उन्होंने डीजे और लेजर लाइट जैसी व्यवस्थाओं के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है।
त्योहारों की मर्यादा और सामाजिक जिम्मेदारी
मंत्री मेघना बोर्डीकर ने कहा कि त्योहार समाज में खुशियां बांटने और लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने के लिए होते हैं। उत्सव मनाते समय दूसरों के स्वास्थ्य और शांति का ध्यान रखना हर नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने मुंबई उच्च न्यायालय द्वारा ध्वनि प्रदूषण पर तय की गई सीमाओं और दिशानिर्देशों को सख्ती से लागू करने पर बल दिया।
पुणे में बढ़ा जन-आक्रोश
यह मुद्दा केवल राजनीतिक बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि आम जनता भी इसके विरोध में सड़कों पर उतर आई है।
नागरिक मार्च: पुणे में 300 से अधिक नागरिकों ने डीजे और साउंड सिस्टम पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर एक बड़ा विरोध मार्च निकाला।
स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं: प्रदर्शनकारियों ने कहा कि डीजे के कारण बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और दिल के मरीजों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
ध्वनि और लेजर का खतरा: तेज आवाज से सुनने की क्षमता प्रभावित होती है और तेज लेजर लाइटों से आंखों को नुकसान पहुंचता है।