जलगांव में बारिश से कपास की फसल हुई बर्बाद
जलगांव : बारिश के कारण जिले में कपास, जवार, मक्का और बाजरा जैसी फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गई हैं। अत्यधिक बारिश के कारण खेतों में पानी भरने से फसलें सड़ गई हैं। इससे कपास की पैदावार में इस साल कमी आने की संभावना है। बारिश के कारण किसानों को भारी नुकसान हुआ है। एक एकड़ में लगभग 10 से 12 क्विंटल कपास की पैदावार हो जाया करती थी, लेकिन इस साल यह 4 से 5 क्विंटल पर सिमट सकता है।
आम तौर पर एक कपास के पौधे पर 70 से 80 बोंडे बनते थे, लेकिन इस साल केवल 30 से 40 बोंडे ही बन पाए हैं। इससे उत्पादन में आधे से ज्यादा की कमी आने की आशंका है। कपास की फसल आमतौर पर दिसंबर से जनवरी तक तैयार होती है, लेकिन इस साल यह नवंबर में ही तैयार हो जाएगी, ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है।
इस साल मजदूरी बढ़ने और कीटनाशक के दाम बढ़ने से किसानों का खर्च भी बढ़ा है, लेकिन उत्पादन कम होने से उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो गई है। वातावरण में बदलाव और अत्यधिक बारिश के कारण किसानों को अधिक मजदूरी देनी पड़ रही है ताकि उनका उत्पाद घर तक पहुंच सके। बारिश के कारण गीले हुए कपास की देखभाल करना भी कठिन हो जाता है।
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ऐसी कपास की फसल को व्यापारी भी कम कीमत पर खरीदते हैं। यह लगभग 5 से 6 हजार रुपये प्रति क्विंटल बिकता है। ऐसे हालातों में किसानों को मजबूरन अपनी फसल
कम दामों पर ही बेचनी पड़ती है। वहीं बारिश के हालातों के कारण मजदूरी भी बढ़कर 200 से 250 रुपये हो गई है। कहीं-कहीं यह 300 रुपये भी हो गई। इसके अलावा, मजदूरों की कमी के कारण किसानों को एक क्विंटल कपास घर लाने के लिए 1000 से 1200 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
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जिले के धानोरा और आसपास के क्षेत्र में हुई भारी बारिश ने खरीफ फसलों को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है। अत्यधिक बारिश के कारण खेतों में कटी फसल भी बर्बाद हो गई। पिछले हफ्ते हुई बारिश ने कपास की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। इससे किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। माना जा रहा है कि यदि बारिश आगे भी जारी रही तो कपास की लगभग पूरी फसल ही बर्बाद हो जाएगी। ऐसे में किसानों ने सरकार से मांग की है कि उनके नुकसान की भरपाई कर उन्हें आर्थिक संकट से उबारा जाए।