

छत्रपति संभाजीनगर स्थित वाल्मी के अतिथि गृह के नवीनीकरण में कथित अनियमितताओं पर मामला दर्ज।
तत्कालीन महानिदेशक विश्वनाथ बाबुनाथ नाथ और ठेकेदार राजेश चव्हाण के नाम शिकायत में शामिल।
ठेकेदार को ₹1.93 करोड़ से अधिक अग्रिम भुगतान देने का आरोप।
VJTI की रिपोर्ट में नवीनीकरण की लागत और भवन की उपयोगी अवधि पर सवाल उठाए गए थे।
शिकायत में निजी ई-टेंडर पोर्टल के इस्तेमाल और सरकारी धन को नुकसान पहुंचाने के आरोप।
Sambhajinagar Vishwanath Babunath Walmi FIR: छत्रपति संभाजीनगर स्थित जल एवं भूमि प्रबंधन संस्थान (वाल्मी) के पुराने अतिथि गृह के नवीनीकरण में कथित अनियमितताओं को लेकर सातारा पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया है। शिकायत में तत्कालीन महानिदेशक विश्वनाथ बाबुनाथ नाथ और ठेकेदार राजेश चव्हाण पर निविदा प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी और 1.93 करोड़ से अधिक अग्रिम भुगतान कराने के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस मामले की जांच करेगी।
छत्रपति संभाजीनगर, जल एवं भूमि प्रबंधन संस्थान (वाल्मी) के करीब 40 वर्ष पुराने अति विशिष्ट अतिथि गृह के नवीनीकरण को लेकर कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि विशेषज्ञों की रिपोर्ट में नया भवन बनाने को बेहतर विकल्प बताए जाने के बावजूद नवीनीकरण का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही निविदा प्रक्रिया और ठेकेदार को अग्रिम भुगतान देने पर भी सवाल उठाए गए हैं।
इस मामले में सातारा पुलिस थाने में वाल्मी के तत्कालीन महानिदेशक विश्वनाथ बाबुनाथ नाथ और ठेकेदार राजेश चव्हाण के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया है। शिकायत वाल्मी की लेखाधिकारी सरला तानाजी देशमुख (कदम) ने दर्ज कराई है। आरोपों की सत्यता का निर्धारण जांच के बाद होगा।
शिकायत के अनुसार, शासन के निर्देशों के तहत 30 वर्ष से अधिक पुरानी इमारतों की संरचनात्मक जांच जरूरी है। आरोप है कि इस प्रक्रिया का उचित पालन किए बिना नवीनीकरण की योजना आगे बढ़ाई गई। बाद में मुंबई स्थित वीरमाता जीजाबाई प्रौद्योगिकी संस्थान (VJTI) से भवन की जांच कराई गई।
23 जुलाई 2025 की रिपोर्ट में नवीनीकरण पर प्रति वर्ग फुट लगभग 8,890 खर्च आने का उल्लेख होने की बात कही गई है। शिकायत के अनुसार, यह लागत नई इमारत के निर्माण की तुलना में भी अधिक बताई गई थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि व्यापक मजबूतीकरण के बाद भवन की उपयोगी अवधि केवल 10 से 12 वर्ष बढ़ सकती है। इसी आधार पर नया अतिथि गृह बनाना अधिक उचित विकल्प बताया गया था।
शिकायत के मुताबिक, अतिथि गृह के नवीनीकरण के लिए 6,01,70,974 का अनुमानित खर्च तय किया गया था। इसके बाद 10 अक्टूबर 2024 को 4,83,89,634 का कार्यादेश जारी किया गया।
आरोप है कि निविदा शासन के आधिकारिक महा-ई-निविदा पोर्टल के बजाय नेक्स्टटेंडर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के निजी पोर्टल पर प्रकाशित की गई। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि काम तत्कालीन महानिदेशक के निकट संबंधी बताए गए राजेश चव्हाण को सौंपा गया।
शिकायत के अनुसार, सार्वजनिक निर्माण विभाग के 16 जनवरी 2019 के शासनादेश में अग्रिम भुगतान की व्यवस्था समाप्त कर दी गई थी। इसके बावजूद 18 अक्टूबर 2024 को कार्यालयीन टिप्पणी के आधार पर ठेकेदार को 1,93,55,354 अग्रिम देने के आदेश जारी किए गए।
शिकायत में दावा किया गया है कि अग्रिम राशि मांगने संबंधी ठेकेदार का पत्र संस्थान की आवक पंजिका में दर्ज नहीं था। तकनीकी समिति ने भी इस भुगतान पर आपत्ति जताई थी।
शिकायत में निविदा के कुल खर्च का 60 से 70 प्रतिशत हिस्सा साज-सज्जा पर रखने और भवन की मजबूती से जुड़े जरूरी कार्यों को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं देने का आरोप भी लगाया गया है। प्रस्तावित कार्यों से इमारत पर अतिरिक्त भार पड़ने की आशंका जताए जाने का उल्लेख भी शिकायत में है।
फिलहाल मामला छत्रपति संभाजीनगर पुलिस जांच के अधीन है। जांच में निविदा प्रक्रिया, भुगतान के आदेश, तकनीकी रिपोर्ट और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।