

Vahdat e Islami Hind Social Awareness Campaign: वहदत-ए-इस्लामी हिंद की ओर से 16 से 26 अगस्त तक देशव्यापी ‘पैगाम रहमत-ए-आलम’ अभियान चलाया जाएगा। अभियान का केंद्रीय विषय ‘मानव को अपने ही हाथों से मरने न दें’ रखा गया है। आत्महत्या, कन्या भ्रूणहत्या, नशीले पदार्थों की लत और वायु प्रदूषण जैसी गंभीर सामाजिक समस्याओं के प्रति लोगों को जागरूक करना तथा मानवीय मूल्यों, करुणा, जिम्मेदारी और नैतिक जीवन के लिए प्रेरित करना अभियान का प्रमुख उद्देश्य है।
अभियान की जानकारी देने के लिए छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित पत्रकार वार्ता में वहदत-ए-इस्लामी हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुहम्मद जियाउद्दीन सिद्दीकी, राष्ट्रीय सचिव डॉ। अनीस और अभियान संयोजक साजिद सहराई ने कहा कि वर्तमान समय में समाज अनेक गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। इन समस्याओं के समाधान के लिए केवल कानून ही पर्याप्त नहीं, बल्कि नैतिक जागरूकता और सामूहिक जिम्मेदारी भी आवश्यक है।
आयोजकों ने कहा कि आत्महत्या आज विश्व के सामने गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी चुनौती बन चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, प्रतिवर्ष सात लाख से अधिक लोग आत्महत्या के कारण अपनी जान गंवाते हैं। अभियान के माध्यम से लोगों में जीवन के प्रति सम्मान और आशा की भावना मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा। लोगों को निराशा से बाहर निकलकर उद्देश्यपूर्ण और सम्मानजनक जीवन जीने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
अभियान में कन्या भ्रूणहत्या को भी प्रमुख विषय बनाया गया है। आयोजकों के अनुसार, बेटियों को जन्म से पहले ही समाप्त करना गंभीर सामाजिक और मानवीय समस्या है। इससे परिवार और समाज का संतुलन प्रभावित होता है। प्रत्येक बेटी को सम्मान, सुरक्षा और समान अधिकार मिलना आवश्यक है। इसके लिए समाज के सभी वर्गों को मिलकर प्रयास करना चाहिए।
नशीले पदार्थों की लत को परिवार और समाज के लिए गंभीर खतरा बताते हुए आयोजकों ने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए कानून के साथ नैतिक शिक्षा, मजबूत चरित्र और परिवार का सहयोग भी जरूरी है। नशे से प्रभावित लोगों के प्रति सहानुभूति रखते हुए उन्हें सामान्य जीवन में लौटाने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाने चाहिए।
वायु प्रदूषण और पर्यावरण के लगातार हो रहे नुकसान के प्रति भी अभियान के माध्यम से जागरूकता फैलाई जाएगी। आयोजकों ने कहा कि पृथ्वी केवल मनुष्य के उपयोग की वस्तु नहीं, बल्कि उसकी रक्षा करना वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी है। पैगंबर मुहम्मद की शिक्षाओं में प्रकृति, जीव-जंतुओं और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी पर जोर दिया गया है। इन्हीं मूल्यों को वर्तमान परिस्थितियों में जनसामान्य तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
अभियान के अंतर्गत 17 राज्यों में करीब 1,000 स्थानों पर जनसंपर्क और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। विभिन्न भाषाओं में पुस्तिकाएं, पर्चे, पोस्टर, स्टिकर और अन्य प्रचार सामग्री तैयार की गई है। इन्हें लोगों के बीच वितरित किया जाएगा। इस दौरान धार्मिक विद्वानों और मस्जिदों के इमामों से भी अपने धार्मिक संबोधनों के माध्यम से इन विषयों पर जागरूकता फैलाने का आह्वान किया गया है।
कार्यक्रम में केंद्रीय सलाहकार परिषद के सदस्य बिस्मिल्लाह शेख और मौलाना मुश्ताक फलाही, प्रेस समन्वयक शेख मुन्तखबुद्दीन सहित महाराष्ट्र और छत्रपति संभाजीनगर इकाई के पदाधिकारी उपस्थित थे। आयोजकों ने कहा कि अभियान का उद्देश्य केवल समस्याओं के प्रति जागरूकता पैदा करना नहीं, बल्कि करुणा, जिम्मेदारी, नैतिकता और मानव सेवा पर आधारित बेहतर समाज के निर्माण के लिए लोगों को प्रेरित करना है।