

Investigation Team Checks Records In Sambhajinagar: मराठवाड़ा के बहुचर्चित बोगस शालार्थ आईडी घोटाले की जांच के लिए छत्रपति संभाजीनगर पहुंचा शिक्षा विभाग का दल पांच दिन की पड़ताल के बाद मुंबई लौट गया।
दल ने शिक्षा उपसंचालक कार्यालय में विभिन्न संस्थाओं की फाइलों, मंजूरियों और संबंधित अभिलेखों की गहन जांच की। नेताओं और पूर्व शिक्षा अधिकारियों से जुड़ी संस्थाओं के दस्तावेज भी जांच के दायरे में रहे। कई फाइलों पर आपत्तिजनक टिप्पणियां दर्ज किए जाने की चर्चा है।
शालार्थ ID घोटाले की जांच के दौरान शिक्षा विभाग की टीम ने जिला परिषद की संच मान्यता से जुड़े रिकॉर्ड की गहन पड़ताल की। इसके साथ ही कथित फर्जी कक्षा मंजूरी, स्कूलों की मान्यता और शिक्षक नियुक्तियों से संबंधित दस्तावेज भी खंगाले गए।
जांच दल ने यह भी देखा कि विभिन्न संस्थाओं को मंजूरी किस आधार पर दी गई थी और उससे जुड़े अभिलेख उपलब्ध हैं या नहीं। पुराने रिकॉर्ड नहीं मिलने पर कथित तौर पर तैयार किए गए आउटवर्ड नंबर वाले कुछ दस्तावेज भी जांच के सामने आए। इन दस्तावेजों की प्रामाणिकता और उन्हें तैयार करने की परिस्थितियों की भी पड़ताल की जा रही है।
आरोप है कि वर्ष 2011 से अस्तित्व में नहीं रहने वाली कुछ स्कूलों के नाम पर कक्षाओं और शिक्षकों की मंजूरी दिखाई गई। कथित फर्जी आधार कार्ड के जरिए विद्यार्थियों की संख्या दर्शाकर सरकारी वेतन अनुदान हासिल करने और बंद विनाअनुदानित स्कूलों को 20 से 80 प्रतिशत तक अनुदान देने के मामलों की भी पड़ताल की जा रही है।
घोटाले की जांच में कुछ पूर्व शिक्षा अधिकारियों के नाम पर कथित फर्जी हस्ताक्षर और आउटवर्ड नंबर वाले पत्र तैयार कर पुराने रिकॉर्ड दोबारा बनाने की चर्चा सामने आई है। इन दस्तावेजों की सत्यता की जांच की जा रही है।
वहीं, मामले से जुड़े कुछ अधिकारियों के अग्रिम जमानत के प्रयास करने तथा भूमिगत होने की जानकारी भी सामने आई है। जांच एजेंसियां संबंधित अधिकारियों की भूमिका और दस्तावेजों की पड़ताल कर रही हैं। शालार्थ ID घोटाले की जांच फिलहाल एसआईटी के स्तर पर जारी है।