

Political Clash Over Khaires Role: शहरवासियों को नई पेयजल योजना से हर दिन पानी मिलने का सपना पिछले करीब दो दशक से अधूरा है। करीब 350 करोड़ रुपये की लागत से शुरू हुई योजना देखते ही देखते 2,750 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, लेकिन शहर के कई इलाकों में आज भी नियमित पेयजल आपूर्ति नहीं हो सकी है।
इसी मुद्दे को लेकर गुरुवार को मनपा की आम सभा में जमकर राजनीतिक घमासान हुआ। भाजपा नगरसेवक राज वानखेड़े ने नई पेयजल योजना में देरी के लिए पूर्व सांसद चंद्रकांत खैरे को जिम्मेदार ठहराते हुए इसे 'खैरे का पाप' करार दिया। इस बयान पर उबाठा के नगरसेवक भड़क गए और सदन में कुछ देर हंगामे की स्थिति बन गई।
आम सभा में उबाठा के गुटनेता गणेश लोखंडे ने शहरवासियों को नई पेयजल योजना से पानी मिलने में हो रही देरी पर प्रशासन को घेरा। उन्होंने सवाल किया कि आखिर शहरवासियों को नई योजना का पानी कब मिलेगा। उनका कहना था कि मनपा प्रशासन और महापौर कई बार योजना से पानी मिलने की तारीखें घोषित कर चुके हैं, लेकिन हर बार तारीख आगे बढ़ जाती है।
इसी दौरान भाजपा नगरसेवक राज वानखेड़े अपनी सीट से खड़े हुए और तीखे शब्दों में कहा कि नई पेयजल योजना में हो रही देरी के लिए पूर्व सांसद चंद्रकांत खैरे जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि यह 'खैरे का पाप' है। वानखेड़े के इस आरोप के बाद सभागार में माहौल गर्म हो गया।
इस पर गणेश लोखंडे ने पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा भी कई वर्षों तक उबाठा के साथ मनपा की सत्ता में रही है। ऐसे में अब केवल उबाठा पर आरोप लगाना कहां तक उचित है। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के चलते कुछ देर तक सदन में गहमागहमी रही।
वानखेड़े ने दावा किया कि महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में सरकार आने के बाद नई पेयजल योजना के काम को गति मिली। उन्होंने योजना में हुई देरी के लिए मनपा में पूर्ववर्ती सत्ता को जिम्मेदार ठहराया।
बढ़ते विवाद को देखते हुए महापौर समीर राजूरकर ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने नगरसेवकों से कहा कि पहले क्या हुआ, इसे छोड़कर वर्तमान समस्या पर चर्चा की जाए और शहरवासियों को पानी उपलब्ध कराने के मुद्दे पर समाधान सुझाया जाए।
पेचदार होती चर्चा के बीच वंचित बहुजन आघाड़ी के नगरसेवक अमित भुईगल ने भी नई पेयजल योजना को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने योजना की प्रगति और शहरवासियों को पानी मिलने की समयसीमा पर प्रशासन से स्पष्ट जवाब मांगा। महापौर राजूरकर ने कहा कि नई पेयजल योजना का काम हाईकोर्ट की निगरानी में चल रहा है।
इसलिए सदन में इस विषय पर अधिक चर्चा करना उचित नहीं होगा। इस पर भुईगल ने कहा कि हाईकोर्ट का डर दिखाने के बजाय यह स्पष्ट किया जाए कि शहरवासियों को नई योजना से पानी आखिर कब मिलेगा। इस दौरान महापौर और भुईगल के बीच तीखी नोकझोंक हुई। विवाद बढ़ता देख महापौर ने राष्ट्रगीत पढ़कर सभा का समापन कर दिया।
गणेश लोखंडे ने कहा कि शहर के बाहरी इलाकों में लोगों ने करोड़ों रुपये खर्च कर मकान बनाए हैं, लेकिन पर्याप्त पानी नहीं मिलने के कारण कई लोग दोबारा शहर की ओर लौटने को मजबूर हैं। सातारा-देवलाई, पडेगांव और हर्सूल क्षेत्र के नागरिक वर्षों से नई पेयजल योजना के पानी का इंतजार कर रहे हैं।
उन्होंने प्रशासन से पूछा कि आखिर इन इलाकों में पानी की समस्या का स्थायी समाधान कब होगा। विपक्षी पक्ष के नेता समीर साजिद भी लगातार लोखंडे को बोलने का मौका देने की मांग करते रहे। उन्होंने कहा कि लोखंडे शहर की गंभीर पेयजल समस्या को सदन के सामने रख रहे हैं, इसलिए उन्हें अपनी बात पूरी करने दी जानी चाहिए।
नई पेयजल योजना के साथ-साथ शहर में दूषित पानी की समस्या भी आम सभा में प्रमुखता से उठी। शिवसेना नगरसेवक ऋषिकेश जायसवाल ने चुना भट्टी, धनमंडी और कुंवार फल्ली क्षेत्रों में महीनों से आ रहे दूषित पानी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि वह कई बार अधिकारियों को इस समस्या से अवगत करा चुके हैं, लेकिन अब तक समाधान नहीं हुआ।
जायसवाल दूषित पानी की बोतलें लेकर सभागार पहुंचे और प्रशासन को घेरा। AIMIM नगरसेवक वाजिद जागीरदार ने शरीफ कॉलोनी में लंबे समय से दूषित पानी की समस्या उठाते हुए तत्काल समाधान की मांग की।
राज वानखेड़े ने छत्रपति नगर, भारत माता नगर और रोजेबाग क्षेत्र की पेयजल समस्या भी सदन के सामने रखी। वहीं नगरसेवक मीर वाजिद अली ने गरम पानी, बूढ़ी लाइन क्षेत्र में दूषित पानी की समस्या का मुद्दा उठाकर प्रशासन से कार्रवाई की मांग की।
नई पेयजल योजना को लेकर हुई लंबी बहस ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि लागत कई गुना बढ़ने के बावजूद शहरवासियों को नियमित पानी के लिए अभी कितना और इंतजार करना पड़ेगा।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच आम सभा में हर दल के नगरसेवकों ने अपने-अपने क्षेत्र की पानी की समस्या रखी, लेकिन शहरवासियों को सबसे ज्यादा इंतजार प्रशासन की ओर से मिलने वाले उस स्पष्ट जवाब का है कि नई पेयजल योजना का पानी घरों तक आखिर कब पहुंचेगा।