

Chhatrapati Sambhajinagar Arrested Parshuram Gaikwad: अपराध करने के बाद पुलिस से बचने के लिए आरोपी अक्सर शहर और ठिकाने बदलते हैं, लेकिन 23 मामलों में वांछित परशुराम गायकवाड़ ने छत्रपति संभाजीनगर पुलिस की नजर से बचने के लिए पूरी व्यवस्था ही बदल दी थी। वह किसी शहर में पहुंचने के बाद होटल में कमरा नहीं लेता था, बल्कि अपनी गाड़ी को ही रात बिताने का ठिकाना बनाता था। अपने नाम पर मोबाइल सिम नहीं रखता और संपर्क के लिए इंटरनेट कॉलिंग का इस्तेमाल करता था।
इतना ही नहीं, हर बार उसके साथ रहने वाले लोग भी अलग होते थे। उसकी यह सुनियोजित कार्यप्रणाली वैजापुर व ग्रामीण क्राईम ब्रांच पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई थी। हालांकि, ग्रामीण पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से उसके नेटवर्क को तोड़ते हुए दो साथियों को उजनी के गन्ने के खेत से गिरफ्तार कर लिया।
वहीं, समृद्धि महामार्ग पर डकैती के मामले में पुलिस ने करीब 1,300 किलोमीटर तक पीछा करने के बाद दिल्ली में परशुराम और उसके एक साथी को दबोच लिया।
परशुराम गायकवाड़ अपनी टीम के लोगों से भी बेहद सावधानी से संपर्क करता था। फोन आने पर वह कई बार गाड़ी से बाहर निकलकर अलग स्थान पर बातचीत करता था। इससे उसके साथ मौजूद लोगों को भी यह पता नहीं चलता था कि वह किससे और किस विषय पर बात कर रहा है। वह हर बार दो नए लोगों को अपने साथ रखता था और उनके सामने अपराध से जुड़ी योजनाओं पर चर्चा नहीं करता था।
पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए उमेश लक्ष्मण गायकवाड़ और ज्ञानेश्वर शहादेव जाधव उजनी बांध क्षेत्र के करीब 8 से 10 एकड़ में फैले गन्ने के खेत में छिपे हुए थे। परशुराम ने पुलिस को चुनौती दी थी कि उसके दोनों साथियों को गन्ने के खेत से पकड़कर दिखाएं। पुलिस ने स्थानीय ग्रामीणों की सहायता से पूरे खेत को घेर लिया। क्षेत्र में तेंदुए की मौजूदगी की सूचना के कारण सावधानी बरतते हुए तलाशी अभियान चलाया गया और दोनों आरोपियों को पकड़ लिया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि परशुराम गायकवाड़ पुलिस की कार्यप्रणाली को समझने का प्रयास करता था। इससे पहले किरण अजिनाथ गायकवाड़ की गिरफ्तारी के दौरान बनाए गए पुलिस कार्रवाई के वीडियो आरोपियों तक पहुंच गए थे। इन वीडियो का विश्लेषण कर पुलिसकर्मियों की पहचान करने की कोशिश की गई। स्नातक परशुराम पुलिस से बचने और अपनी गतिविधियों को छिपाने के तरीकों की जानकारी इंटरनेट पर खोजता था।
परशुराम गायकवाड़ के गांव में उसके घर के आसपास लगे निगरानी कैमरों की जानकारी उसके संपर्क में रहने वाले लोगों तक पहुंचती थी। गांव में कोई नया या संदिग्ध व्यक्ति दिखाई देने पर उसे तत्काल सूचना दी जाती थी। इस वजह से पुलिस को कार्रवाई के दौरान अपनी पहचान और गतिविधियों को पूरी तरह गुप्त रखना पड़ा।
परशुराम गायकवाड़ के खिलाफ 23 आपराधिक मामले दर्ज हैं। बीड, अहिल्यानगर, छत्रपति संभाजीनगर और नासिक सहित 8 जिलों की पुलिस को उसकी तलाश थी। उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट भी जारी था। उसे बीड जिले की सीमा से बाहर जाने का आदेश दिया गया था।
समृद्धि महामार्ग डकैती मामले की जांच के दौरान पुलिस ने परशुराम की तलाश शुरू की। उसका सुराग मिलने के बाद पुलिस दल दिल्ली पहुंचा। करीब 1,300 किलोमीटर की यात्रा और लगभग 72 घंटे तक चले अभियान के बाद पुलिस ने दिल्ली के एक बाजार में रणनीति बनाकर परशुराम और उसके साथी करण भरत जाधव को हिरासत में लिया।
इस मामले में अब तक सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि दो अन्य की तलाश जारी है। यह जानकारी छत्रपति संभाजीनगर ग्रामीण के एसपी प्रकाश जाधव ने दी।