Marathwada Farmer Suicide Stats 2026 Chhatrapati Sambhajinagar Beed: मराठवाड़ा में सूखे, बारिश की कमी और फसलों को हुए नुकसान के बीच किसानों की आत्महत्याओं का सिलसिला जारी है। विभागीय आयुक्त कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से सितंबर 2026 तक संभाग में 760 किसानों ने आत्महत्या की, जबकि सितंबर में 108 मामले दर्ज हुए। आर्थिक सहायता के 282 प्रकरण अभी लंबित हैं।
छत्रपति संभाजीनगर, मराठवाड़ा में बारिश की कमी, जल संकट और खरीफ फसलों को हुए नुकसान के बीच किसानों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। विभागीय आयुक्त कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से सितंबर 2026 तक संभाग में 760 किसानों ने आत्महत्या की। वहीं, सितंबर महीने में ही 108 किसानों की आत्महत्या के मामले सामने आए। ये आंकड़े क्षेत्र में कृषि संकट और किसानों के सामने मौजूद आर्थिक चुनौतियों की गंभीरता को दर्शाते हैं।
विभागीय आयुक्त कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर में मराठवाड़ा के आठ जिलों में कुल 108 किसानों ने आत्महत्या की। इस दौरान बीड़ जिले में सबसे अधिक 21 मामले दर्ज किए गए। छत्रपति संभाजीनगर और नांदेड़ में 16-16, धाराशिव में 13, परभणी और हिंगोली में 11-11 तथा जालना और लातूर में 10-10 किसानों की आत्महत्या के मामले सामने आए।
सितंबर के आंकड़ों के मुताबिक, संभाग में प्रतिदिन औसतन तीन से अधिक किसानों की आत्महत्या दर्ज की गई।
विभागीय आयुक्त कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी से 30 सितंबर 2026 के बीच आठ जिलों में किसानों की आत्महत्याओं का विवरण इस प्रकार है।
इन आंकड़ों में बीड़ जिले में सबसे अधिक 170 मामले दर्ज किए गए, जबकि छत्रपति संभाजीनगर दूसरे स्थान पर रहा।
मराठवाड़ा में इस वर्ष अपर्याप्त बारिश के कारण वर्षा की कमी करीब 38 फीसदी तक पहुंचने की बात रिपोर्ट में कही गई है। इसके चलते कई इलाकों में जल संकट गंभीर हुआ है और खरीफ फसलों को नुकसान पहुंचा है।
क्षेत्र के किसानों की खेती काफी हद तक बारिश पर निर्भर है। पर्याप्त सिंचाई सुविधाओं के अभाव में बारिश का लंबा अंतराल फसलों की वृद्धि और उत्पादन को प्रभावित करता है। इससे किसानों की आमदनी पर भी दबाव बढ़ता है।
मराठवाड़ा के किसानों को पिछले वर्षों में कभी सूखे तो कभी अतिवृष्टि के कारण नुकसान उठाना पड़ा है। इस बार भी बारिश की अनिश्चितता ने खेती की योजना को प्रभावित किया है। जिन इलाकों में पीने के पानी की समस्या है, वहां रबी फसलों की बुआई को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
किसान आत्महत्या के मामलों में प्रभावित परिवारों को सरकार की ओर से आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है। विभागीय आयुक्त कार्यालय के अनुसार, अब तक 403 प्रकरण सहायता के लिए पात्र पाए गए हैं। वहीं, 282 प्रकरण जांच या निर्णय के लिए लंबित हैं, जबकि 75 मामलों को अपात्र घोषित किया गया है।
इन आंकड़ों के बीच पात्र परिवारों तक सहायता पहुंचाने और लंबित मामलों पर निर्णय लेने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण बनी हुई है।
मराठवाड़ा में सिंचाई सुविधाओं की सीमित उपलब्धता के कारण किसानों को मौसम की अनिश्चितताओं पर निर्भर रहना पड़ता है। बारिश समय पर और पर्याप्त होने पर खरीफ के साथ रबी की फसल से भी उम्मीद रहती है, लेकिन वर्षा की कमी या लंबे अंतराल से दोनों मौसमों की खेती प्रभावित हो सकती है।
मौजूदा हालात में जल संकट, फसल नुकसान और आर्थिक दबाव किसानों के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। ऐसे में प्रभावित परिवारों को समय पर सहायता, किसानों के लिए उपलब्ध योजनाओं तक पहुंच और कृषि संकट से निपटने के प्रभावी उपायों की जरूरत बनी हुई है।