

Marathwada Water Crisis: मराठवाड़ा में मानसून की बेरुखी अब गंभीर जलसंकट का संकेत देने लगी है। पिछले 26 दिनों से बारिश नहीं होने के कारण खेतों में खड़ी खरीफ फसलें सूखने लगी हैं और किसानों की चिंता बढ़ गई है। पूरे विभाग में अब तक औसत की तुलना में करीब 30 प्रतिशत कम बारिश हुई है।
बांधों में भी पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम पानी है. इस बिकट स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने जायकवाड़ी को छोड़कर मराठवाड़ा के अन्य प्रमुख बांधों के पानी को पेयजल के लिए सुरक्षित रखने का निर्णय लिया है। यह जानकारी विभागीय आयुक्त जी. श्रीकांत ने दी।
मराठवाड़ा में जायकवाड़ी सहित 11 प्रमुख बांध हैं। इनमें वर्तमान में कुल 5219.19 दलघमी पानी उपलब्ध है. इनमें उपयोगी जलसंचय 3492.48 दलघमी है। कुल जलसंचय की स्थिति 67.73 प्रतिशत है. पिछले वर्ष इसी तारीख को इन बांधों में 96.82 प्रतिशत पानी उपलब्ध था। यानी एक साल में जलसाठे की स्थिति में भारी गिरावट आई है। जायकवाड़ी को छोड़कर अधिकांश बड़े बांध अपेक्षित स्तर तक नहीं भर पाए हैं। विष्णुपुरी बांध में सर्वाधिक 94.23 प्रतिशत जलसंचय है, जबकि जायकवाड़ी में फिलहाल 89.97 प्रतिशत पानी उपलब्ध है। इसके विपरीत सीना कोलेगांव बांध पूरी तरह सूख चुका है।
मराठवाड़ा के आठों जिलों में इस वर्ष बारिश का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। पूरे विभाग में करीब 30 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है. लातूर में सबसे गंभीर स्थिति है, जहां बारिश में 46 प्रतिशत कमी रही। परभणी में 43 प्रतिशत कम बारिश हुई है। बारिश की लंबी खामोशी से जलस्रोतों के साथ खेती पर भी संकट गहरा गया है। छत्रपती संभाजीनगर जिले में बारिश की कमी करीब 15 प्रतिशत है। पर्याप्त वर्षा नहीं होने से खरीफ की फसलें प्रभावित हो रही हैं। मौजूदा स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने रबी फसल की योजना नहीं बनाने का निर्णय लिया है।
बारिश की कमी का असर ग्रामीण क्षेत्रों में साफ दिखाई देने लगा है। मराठवाड़ा के करीब 450 गांव इस समय जलसंकट का सामना कर रहे हैं। इन गांवों में टैंकरों के माध्यम से पेयजल पहुंचाया जा रहा है। साथ ही निजी कुओं का अधिग्रहण कर ग्रामीणों को पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। वर्तमान में 88 टैंकरों से विभिन्न क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति की जा रही है।
जलसंकट की गंभीरता को देखते हुए जायकवाड़ी को छोड़कर अन्य जिलों के बांधों का पानी पेयजल के लिए सुरक्षित रखने का फैसला किया गया है। मांजरा और माकणी बांधों के पानी को विशेष रूप से आरक्षित किया गया है। इन दोनों जलाशयों पर प्रशासन की निगरानी बढ़ा दी गई है। बांधों से अनधिकृत तरीके से पानी निकालने पर भी रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए बांधों पर लगी विद्युत मोटरों को जब्त करने की कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। प्रशासन का उद्देश्य उपलब्ध जलसाठे को संरक्षित रखना और आगामी दिनों में नागरिकों की पेयजल आवश्यकता पूरी करना है।
निम्न दुधना में 22.49 प्रतिशत, येलदरी में 62.52 प्रतिशत, सिद्धेश्वर में 35.06 प्रतिशत, माजलगांव में 25.90 प्रतिशत, मांजरा में 12.26 प्रतिशत, पेनगंगा में 68.93 प्रतिशत, मानार में 61.44 प्रतिशत और निम्न तेरणा में 24.27 प्रतिशत जलसंचय है। बारिश के लगातार गायब रहने से मराठवाड़ा में खेती और पेयजल दोनों मोर्चों पर संकट गहराता जा रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में बारिश होती है या नहीं, इस पर किसानों के साथ प्रशासन की भी नजर टिकी हुई है।