संभाजीनगर में मनोज जरांगे के अनशन के बीच मराठा आरक्षण पर अहम बैठक, कुणबी रिकॉर्ड व सगे-सोयरे पर मंथन जारी

Chhatrapati Sambhajinagar News: मनोज जरांगे पाटिल के अनशन के बीच छत्रपति संभाजीनगर में शिंदे समिति व विशेषज्ञों की बैठक जारी है, जिसमें कुणबी रिकॉर्ड, सगे-सोयरे और अन्य मांगों पर चर्चा हो रही है।
Crucial meeting on Maratha reservation in Sambhajinagar amidst Manoj Jarange's hunger strike
छत्रपति संभाजीनगर स्मार्ट सिटी कार्यालय मराठा आरक्षण बैठकफोटो सोर्स- नवभारत
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Sambhajinagar Maratha Reservation Meeting: छत्रपति संभाजीनगर के स्मार्ट सिटी कार्यालय में मराठा आरक्षण के मुद्दे पर महत्वपूर्ण बैठक चल रही है। बैठक में सरकार के प्रतिनिधियों के साथ पूर्व न्यायमूर्ति शिंदे समिति और मराठा आरक्षण के विशेषज्ञ शामिल हुए हैं।

बैठक में हैदराबाद गजट के आधार पर मिले कुणबी रिकॉर्ड, इन रिकॉर्ड के आधार पर कुणबी प्रमाणपत्र हासिल करने में आ रही परेशानियों और मराठा आरक्षण से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

मनोज जरांगे के अनशन के बीच बैठक पर नजर

यह बैठक मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटील के अनशन की पृष्ठभूमि में हो रही है। ऐसे में बैठक में होने वाली चर्चा और सरकार की ओर से लिए जाने वाले फैसलों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बैठक के बाद जरांगे पाटील सरकार के रुख से संतुष्ट होते हैं या नहीं और अपना अनशन वापस लेते हैं या नहीं, इस पर भी नजर बनी हुई है।

58 लाख कुणबी रिकॉर्ड के आधार पर प्रमाणपत्र की मांग

जरांगे पाटील की प्रमुख मांगों में पूर्व न्यायमूर्ति शिंदे समिति द्वारा खोजे गए 58 लाख कुणबी रिकॉर्ड के आधार पर संबंधित लोगों को तत्काल कुणबी प्रमाणपत्र देने की मांग शामिल है।

इसके अलावा हैदराबाद गजट में दर्ज रिकॉर्ड के आधार पर मराठवाड़ा के मराठा समाज को कुणबी प्रमाणपत्र देने और इन प्रमाणपत्रों की वैधता तय करने की प्रक्रिया स्पष्ट करने की मांग भी रखी गई है।

गजटियर और अलग मंत्रालय की मांग

जरांगे की मांगों में सातारा संस्थान, कोल्हापुर संस्थान और औंध-पुणे-बॉम्बे गवर्नमेंट गजटियर को लेकर तत्काल जीआर जारी कर उसका क्रियान्वयन करने की मांग शामिल है।

इसके साथ ही मराठा और कुणबी नाम से अलग मंत्रालय स्थापित करने की मांग भी की गई है।

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आंदोलनकारियों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग

मराठा आंदोलन से जुड़े मामलों को लेकर भी जरांगे पाटील की कई मांगें हैं। इनमें अंतरवाली सराटी समेत पूरे महाराष्ट्र में मराठा आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को सामूहिक रूप से वापस लेने की मांग शामिल है।

कुणबी प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करने वालों को प्रमाणपत्र जारी करने और प्रमाणपत्र प्राप्त कर चुके लोगों को तत्काल वैधता प्रमाणपत्र देने की मांग भी रखी गई है।

सारथी, छात्रवृत्ति और छात्रावास से जुड़े मुद्दे

जरांगे पाटील ने सारथी संस्था की लंबित योजनाओं को शुरू करने की मांग की है। इसके अलावा डॉ. पंजाबराव देशमुख छात्रवृत्ति का फंड तत्काल वितरित करने और छात्रावास की सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी शामिल है।

मराठा समाज को OBC की सुविधाएं और रियायतें देने से संबंधित जीआर को प्रभावी तरीके से लागू करने की मांग भी की गई है।

EWS, SEBC और ESBC युवाओं की नियुक्ति

मांगों में EWS, SEBC और ESBC वर्ग से चयनित मराठा युवाओं को तत्काल नियुक्ति पत्र देने की बात भी शामिल है।

इसके साथ ही अण्णासाहेब पाटील महामंडल के माध्यम से वाहन खरीदने वाले मराठा युवाओं के लंबित ब्याज की पूरी राशि सरकार द्वारा जमा करने की मांग की गई है।

‘सगे-सोयरे’ अधिसूचना लागू करने की मांग

मराठा आरक्षण से जुड़े सबसे अहम मुद्दों में ‘सगे-सोयरे’ अधिसूचना का क्रियान्वयन भी शामिल है। जरांगे पाटील की मांग है कि इसे तत्काल लागू किया जाए।

आंदोलन में बलिदान देने वाले लोगों के परिवार के सदस्यों को सरकारी नौकरी और आर्थिक सहायता देने की मांग भी रखी गई है।

जाति सत्यापन समितियों को भंग करने की मांग

मांगों की सूची में राज्य की जाति प्रमाणपत्र सत्यापन समितियों को भंग करने की मांग भी शामिल है। साथ ही शिंदे समिति को पुराने रिकॉर्ड दोबारा जांचकर कुणबी रिकॉर्ड की खोज जारी रखने के निर्देश देने की मांग की गई है।

अब संभाजीनगर में चल रही इस बैठक में सरकार और समिति की ओर से इन मांगों पर क्या रुख सामने आता है, इस पर मराठा आरक्षण आंदोलन से जुड़े लोगों की नजर है।

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