

Manoj Jarange Patil Allegations: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर जालना जिले के अंतरवाली सराटी में मनोज जरांगे पाटिल का अनिश्चितकालीन अनशन लगातार जारी है। अनशन के 12वें दिन जरांगे पाटिल की शारीरिक स्थिति बिगड़ने पर डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें सलाइन चढ़ाया गया।
सलाइन के दौरान ही आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जरांगे पाटिल ने छत्रपति संभाजीनगर में हुई राज्य सरकार की बैठक को लेकर कड़ा हमला बोला और सरकार पर आंदोलन को कुचलने का षड्यंत्र रचने का आरोप लगाया।
मंत्रियों और सत्ताधारियों द्वारा उनकी भाषा शैली को लेकर दिए जा रहे बयानों और सलाह पर कड़ा ऐतराज जताते हुए मनोज जरांगे ने कहा कि सरकार के लोग अब उनकी भाषा का बहाना बनाकर अपनी जिम्मेदारियों से भागने का रास्ता तलाश रहे हैं।
उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा, यह रोने वाले लोग सच बताने के लिए तैयार नहीं हैं। मेरी भाषा सिर्फ एक बहाना बनाई जा रही है। मैं जातवान कुणबी हूं। जरांगे ने आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे लोग मराठा और ओबीसी समुदायों को एक-दूसरे के आमने-सामने खड़ा करके अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने का काम कर रहे हैं।
उद्योग मंत्री उदय सामंत और विधायक प्रसाद लाड द्वारा छत्रपति संभाजीनगर में बुलाई गई बैठक पर निशाना साधते हुए जरांगे ने कहा कि इस बैठक में केवल मराठा आंदोलन को खत्म करने का योजनाबद्ध षड्यंत्र रचा गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार केवल बैठकों का दिखावा कर रही है, जबकि पिछले दो महीनों से उठाई जा रही मांगों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। रद्द किए गए चार जाति प्रमाणपत्रों को वैध करने और हैदराबाद गजट को आधिकारिक रूप से लागू करने को लेकर सरकार कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।
मनोज जरांगे ने सीधे तौर पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और मंत्री संजय शिरसाट पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि मराठों के प्रमाणपत्र रद्द करने का काम पूर्व-नियोजित तरीके से किया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या छत्रपति संभाजीनगर में बैठकर दंगा भड़काने का नियोजन किया जा रहा है। जरांगे ने एकनाथ शिंदे को आगाह करते हुए कहा कि वे मराठों को मराठों के खिलाफ लड़ाने का पाप न करें, अन्यथा इस पूरी परिस्थिति के लिए सीधे तौर पर केवल शिंदे ही जिम्मेदार होंगे।
अंत में राज्य सरकार को अंतिम चेतावनी देते हुए मनोज जरांगे ने कहा कि सरकार को 12 सितंबर तक का समय दिया जा रहा है। यदि इस समयावधि के भीतर सरकार ने मराठा आरक्षण का प्रश्न नहीं सुलझाया, तो 12 सितंबर के बाद मराठा समाज का मुंबई जाने का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाएगा और वे शांति के रास्ते से मुंबई पहुंचकर अपना हक लेकर ही रहेंगे।