

Chhatrapati Sambhajinagar EV Vehicle Allowance Dispute: भाजपा-महायुति की सत्ता वाली छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका की स्थायी समिति में मंगलवार को पदाधिकारियों के वाहन खर्च को लेकर पेश किए गए प्रस्ताव पर सवाल उठ गए। यांत्रिकी विभाग ने महापौर, उपमहापौर, स्थायी समिति सभापति, विपक्ष के नेता तथा विभिन्न समितियों के सभापतियों के वाहनों के लिए हर महीने ईंधन और अन्य खर्च की प्रतिपूर्ति का प्रस्ताव रखा था। इसमें पेट्रोल-डीजल वाहनों के साथ विद्युत वाहनों के लिए भी बड़ी राशि प्रस्तावित की गई थी। सवाल उठने के बाद स्थायी समिति सभापति अनिल मकरिये ने प्रस्ताव खारिज कर दिया और संशोधित प्रस्ताव अगली बैठक में पेश करने के निर्देश दिए।
प्रस्ताव के अनुसार महापौर के पेट्रोल वाहन के लिए 83 हजार, डीजल वाहन के लिए 85 हजार और विद्युत वाहन के लिए 76 हजार रुपये मासिक प्रतिपूर्ति प्रस्तावित थी। वहीं उपमहापौर, स्थायी समिति सभापति और विपक्ष के नेता के लिए पेट्रोल वाहन पर 62 हजार, डीजल वाहन पर 64 हजार तथा विद्युत वाहन पर 55 हजार रुपये मासिक राशि का प्रस्ताव था। इसमें चालक का वेतन और वाहन की देखभाल का खर्च भी शामिल किया गया था।
प्रस्ताव सामने आते ही नगरसेवकों ने सवाल उठाया कि विद्युत वाहनों में पेट्रोल-डीजल का खर्च नहीं होता, फिर उनके लिए इतनी बड़ी प्रतिपूर्ति क्यों दी जा रही है। सदस्यों ने विद्युत वाहन के लिए अलग से इतनी राशि देने की आवश्यकता पर भी सवाल उठाया।
उल्लेखनीय है कि पिछली बैठक में चाय 38, नाश्ता 70 और भोजन के लिए 599 रुपये की दरों का प्रस्ताव भी विवादों में आने के बाद स्थगित किया गया था। अब वाहन भत्ते का प्रस्ताव भी विवाद के कारण अटक गया है।
इधर मंगलवार को छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका की स्थायी समिति की बैठक में जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने में हो रही देरी को लेकर प्रशासन और नगरसेवकों के बीच तीखी बहस हुई। नगरसेवकों ने अधिकारियों पर जानबूझकर फाइलें रोकने और नागरिकों को महीनों तक कार्यालयों के चक्कर लगाने का आरोप लगाया।
नगरसेवकों का कहना था कि प्रमाणपत्र समय पर नहीं मिलने के कारण नागरिक दलालों के चंगुल में फंस रहे हैं। वहीं, सभी जोन अधिकारियों ने आंकड़ों के साथ सफाई देते हुए कहा कि हजारों आवेदकों को ऑनलाइन शुल्क जमा करने के लिए लिंक भेजी गई थी, लेकिन उन्होंने निर्धारित शुल्क का भुगतान ही नहीं किया। प्रशासन की इस सफाई के बाद नगरसेवक भी कुछ मामलों में पसोपेश में नजर आए।
बैठक में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक 1 अप्रैल से 17 अगस्त के बीच छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका के 10 जोन कार्यालयों में जन्म प्रमाणपत्र के लिए 19,444 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 10,102 प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं, जबकि 9,342 आवेदन अब भी लंबित हैं। इसी अवधि में मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए 2,701 आवेदन आए। जबकि 1,457 लंबित हैं। नगरसेवक राजगौरव वानखेडे ने मुद्दा उठाते हुए कहा कि समय पर प्रमाणपत्र नहीं मिलने से नागरिक दलालों की तलाश करने लगते हैं।